मंगलवार, 17 मार्च 2026
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आगरा में सत्ता का नशा: बीजेपी विधायक के बेटे ने टोलकर्मी को जड़ा थप्पड़, अब भाई ने दी आत्मदाह की चेतावनी—पढ़ें रायभा टोल विवाद की पूरी कहानी

By Uttar World Desk

27 फ़र, 2026 | 11:06 बजे
आगरा में सत्ता का नशा: बीजेपी विधायक के बेटे ने टोलकर्मी को जड़ा थप्पड़, अब भाई ने दी आत्मदाह की चेतावनी—पढ़ें रायभा टोल विवाद की पूरी कहानी

UttarWorld News Desk | आगरा : उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में सत्ता पक्ष के रसूख और दबंगई का एक शर्मनाक वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है। आगरा के फतेहपुर सीकरी से भाजपा विधायक चौधरी बाबूलाल के बेटे सुरेश चौधरी पर रायभा टोल प्लाजा के कर्मचारी के साथ मारपीट करने का आरोप लगा है। अब इस मामले में एक नया मोड़ आ गया है, जहाँ पीड़ित के भाई ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाई है।

घटना मंगलवार दोपहर की बताई जा रही है। रायभा टोल प्लाजा पर विधायक लिखी एक लग्जरी गाड़ी पहुँची, जिसमें विधायक के बेटे सुरेश चौधरी और उनकी पत्नी सवार थे। गाड़ी पर फास्टैग (FASTag) नहीं लगा था। वीआईपी पास होने के बावजूद तकनीकी कारणों से बैरियर खुलने में करीब 2 मिनट की देरी हो गई। बस इतनी सी बात पर विधायक पुत्र अपना आपा खो बैठे। गाड़ी से उतरकर उन्होंने टोल कर्मी संजय सिंह के साथ गाली-गलौज की और उसे जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। यह पूरी शर्मनाक करतूत टोल के सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई।

शुक्रवार को इस मामले में एक नया वीडियो सामने आया है, जिसमें पीड़ित संजय सिंह के भाई वीरू ने पुलिस पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। वीरू का कहना है कि उसका भाई संजय सिंह पिछले कुछ समय से लापता है और पुलिस उसे ढूंढने के बजाय मामले को रफा-दफा करने में जुटी है। वीरू ने आरोप लगाया कि पुलिस विधायक के रसूख के आगे नतमस्तक है और पीड़ित परिवार पर समझौते के लिए दबाव बना रही है।  वीरू ने वीडियो में साफ कहा कि यदि उसके भाई के साथ कोई अनहोनी हुई, तो वह पुलिस कमिश्नर कार्यालय के सामने आत्मदाह कर लेगा।

वायरल वीडियो में युवक (वीरू) दावा कर रहा है कि वह खुद संघ परिवार से जुड़ा है और उसने इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ओएसडी (OSD) से भी बात की है। उसने पुलिस को चुनौती देते हुए कहा कि वह डरने वाला नहीं है और लखनऊ जाकर उच्च अधिकारियों से शिकायत करेगा।

इस पूरे विवाद पर जब विधायक चौधरी बाबूलाल और उनके बेटों का पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फिलहाल कोई भी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है। टोल प्रशासन ने पुलिस को तहरीर दे दी है, लेकिन सत्ता के दबाव के कारण कार्रवाई की रफ्तार धीमी बताई जा रही है।

उत्तर वर्ल्ड (UttarWorld.com) का सवाल: क्या सत्ता की हनक में किसी कर्मचारी के साथ मारपीट करना जायज है? क्या पुलिस रसूखदारों के आगे झुककर न्याय का गला घोंट रही है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें।

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