UttarWorld News Desk | आगरा : उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे जीरो टॉलरेंस अभियान के तहत आगरा के पूर्व मुख्य अभियंता (Chief Engineer) राकेश कुमार मित्तल के खिलाफ विजिलेंस विभाग ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच में सामने आया है कि मित्तल ने अपने कार्यकाल के दौरान स्वीकृत बजट से 200 प्रतिशत से भी अधिक धनराशि खर्च कर डाली, जो सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता और सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला है।
विजिलेंस की लंबी जांच के बाद यह खुलासा हुआ है कि राकेश कुमार मित्तल ने विभिन्न परियोजनाओं में निर्धारित मानकों को ताक पर रखकर काम किया। विजिलेंस सेक्टर आगरा ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करने की संस्तुति की थी, जिस पर शासन ने मुहर लगा दी है।
विजिलेंस की रिपोर्ट के अनुसार, मित्तल ने केवल सत्ता और पद का दुरुपयोग ही नहीं किया, बल्कि सरकारी खजाने को भारी क्षति पहुँचाई किसी भी प्रोजेक्ट के लिए शासन द्वारा जो बजट आवंटित किया गया था, मित्तल ने बिना किसी उच्च अनुमति के उस बजट से 200% ज्यादा पैसा खर्च दिखाया।निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री के इस्तेमाल और कागजों पर अधिक खर्च दिखाने के सबूत भी विजिलेंस के हाथ लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक, विजिलेंस अब उनकी निजी संपत्तियों की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि भ्रष्टाचार का यह पैसा कहां निवेश किया गया।
उत्तर प्रदेश शासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मित्तल के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। विजिलेंस अब मित्तल के कार्यकाल के दौरान हुए अन्य टेंडरों और भुगतान फाइलों को भी खंगाल रही है। माना जा रहा है कि इस खेल में विभाग के कुछ अन्य बड़े अधिकारी और ठेकेदार भी शामिल हो सकते हैं, जिन पर जल्द गाज गिर सकती है।
इंजीनियरिंग विभाग में बजट से 200% ज्यादा खर्च करना कोई सामान्य गलती नहीं है। यह एक सुनियोजित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। आगरा जैसे शहर में जहां स्मार्ट सिटी और अन्य बड़ी योजनाएं चल रही हैं, वहां ऐसे घपले विकास की रफ्तार को रोकते हैं।