अमेठी/मऊ। उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षक एक बार फिर सड़कों पर हैं। बुधवार और गुरुवार को अमेठी के गौरीगंज और मऊ के कलेक्ट्रेट परिसर में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले सैकड़ों शिक्षकों ने प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
शिक्षकों के इस गुस्से का मुख्य कारण संसद में शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी द्वारा दिया गया वह बयान है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार सेवा में बने रहने के लिए सभी शिक्षकों को टीईटी (TET) पास करना अनिवार्य है। शिक्षकों का आरोप है कि यह बयान उन लाखों अनुभवी शिक्षकों के भविष्य को संकट में डालता है जो 2011 (TET लागू होने) से पहले नियुक्त हुए थे।
पुतला दहन: मऊ में आक्रोशित शिक्षकों ने शिक्षा राज्य मंत्री का पुतला फूंका और उनके बयान को "शिक्षक विरोधी" करार दिया।
काला कानून: अमेठी के गौरीगंज में शिक्षकों ने जुलूस निकाला और "काला कानून वापस लो" के नारे लगाए। उन्होंने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन भी सौंपा।
अनुभव की अनदेखी: शिक्षकों का तर्क है कि 15-20 वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर अब परीक्षा का दबाव डालना उनकी गरिमा और सेवा सुरक्षा के खिलाफ है।
सुप्रीम कोर्ट का हवाला: शिक्षक संघ का कहना है कि 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को इस दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए।
महत्वपूर्ण बात यह है कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार इस मामले में शिक्षकों के समर्थन में खड़ी नजर आ रही है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ रिवीजन याचिका (Review Petition) दाखिल करने पर विचार कर रही है, ताकि अनुभवी शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित रहे।