अमेठी:-जिले में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच वोटर लिस्ट के मुद्दे पर संग्राम छिड़ गया है। संग्रामपुर के ठेंगहा गांव में भाजपा जिलाध्यक्ष और एक बीएलओ के बीच हुए कथित विवाद ने अब बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। जहाँ एक तरफ समाजवादी पार्टी और कांग्रेस इस मुद्दे पर सरकार को घेर रही हैं, वहीं भाजपा जिलाध्यक्ष आज प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए अपना पक्ष रखने वाले हैं।
विवाद की शुरुआत बुधवार को ठेंगहा के हरिजन टोला में हुई, जहाँ भारतीय जनता पार्टी की ओर से S.I.R. को लेकर एक बैठक बुलाई गई थी। आरोप है कि इस बैठक में गांव की तीन महिला बीएलओ को भी बुलाया गया था। बीएलओ सुभद्रा कुमारी अपने पति राकेश कुमार मौर्य के साथ जब मीटिंग स्थल पर पहुंचीं, तब तक कार्यक्रम समाप्त हो चुका था। सुभद्रा के पति राकेश मौर्य (जो कांग्रेस में जिला सचिव भी हैं) ने सवाल उठाया कि भाजपा पदाधिकारी बीएलओ की आधिकारिक बैठक कैसे बुला सकते हैं? राकेश का आरोप है कि इसी बात पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनके साथ मारपीट की, उनकी पत्नी (BLO) से अभद्रता की और वीडियो बना रहा मोबाइल छीन लिया।
इस घटना के बाद अमेठी का सियासी पारा सातवें आसमान पर है। विपक्षी दलों ने इसे लोकतंत्र और सरकारी कर्मचारियों के सम्मान पर हमला करार दिया है। सपा जिलाध्यक्ष राम उदित यादव के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने डीएम संजय चौहान से मुलाकात की। सपा का आरोप है कि भाजपा पदाधिकारी अल्पसंख्यक, पिछड़े और एससी-एसटी वर्ग के लोगों के नाम मतदाता सूची से कटवाने के लिए बीएलओ पर अनैतिक दबाव बना रहे हैं। कांग्रेस नेताओं ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर मामले को दिल्ली तक उठाने का आश्वासन दिया। सांसद किशोरीलाल शर्मा ने भी इस प्रकरण में हस्तक्षेप करते हुए प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
विवाद के केंद्र में रहे भाजपा जिलाध्यक्ष सुधांशू शुक्ल ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने किसी भी बीएलओ को बैठक में नहीं बुलाया था। उन पर और कार्यकर्ताओं पर लगाए गए मारपीट के आरोप राजनीति से प्रेरित और झूठे हैं। आज यानी शुक्रवार को वह एक प्रेस वार्ता आयोजित करेंगे, जिसमें वह इस पूरे प्रकरण का सच जनता के सामने रखेंगे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी संजय चौहान ने सहायक निर्वाचन अधिकारी/एसडीएम आशीष सिंह को जांच सौंपी है। पीड़ित बीएलओ सुभद्रा के मुताबिक, एसडीएम के हस्तक्षेप के बाद ही उन्हें थाना संग्रामपुर से अपना छीना हुआ मोबाइल वापस मिल सका। बुधवार और गुरुवार की दरम्यानी रात तक एसडीएम और पुलिस बल गांव में डटे रहे और चश्मदीदों के बयान दर्ज किए।
डीएम का बयान: "मामले की निष्पक्ष जांच सहायक निर्वाचन अधिकारी द्वारा की जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।" — संजय चौहान, जिलाधिकारी अमेठी
निष्कर्ष: अमेठी में यह विवाद केवल एक मारपीट का मामला नहीं रह गया है, बल्कि आगामी चुनावों से पहले 'वोटर लिस्ट' में हेरफेर के आरोपों ने इसे एक बड़ा चुनावी मुद्दा बना दिया है। आज होने वाली भाजपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस और प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर सबकी निगाहें टिकी हैं।