आजमगढ़: जनपद के मुबारकपुर कस्बे में वर्ष 1999 में हुए भीषण सांप्रदायिक दंगे के मामले में जिला जज की अदालत ने सोमवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले में दोषी पाए गए सभी 12 आरोपियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। साथ ही, प्रत्येक दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
घटनाक्रम के अनुसार, 27 अप्रैल 1999 को मुबारकपुर में शिया समुदाय के एक युवक की हत्या के बाद क्षेत्र में तनाव व्याप्त हो गया था। देखते ही देखते यह तनाव सांप्रदायिक हिंसा में बदल गया। कई दिनों तक चले इस खूनी दंगे में 17 लोगों की जान चली गई थी और संपत्ति का भारी नुकसान हुआ था। इस घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था।
इस मामले में पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को जेल भेजा था। करीब 27 साल तक चली लंबी सुनवाई, गवाहों के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने इसी 13 फरवरी को 12 आरोपियों को दोषी करार दिया था। सोमवार को सजा के बिंदु पर बहस पूरी होने के बाद न्यायाधीश ने दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
इतने संवेदनशील मामले में फैसला आने के मद्देनजर जिला कचहरी और मुबारकपुर कस्बे में सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है। भारी संख्या में पुलिस बल और पीएसी तैनात की गई है। प्रशासन ने सोशल मीडिया पर कड़ी नजर रखी है और लोगों से शांति बनाए रखने व किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है।
दंगे के करीब पौने तीन दशक बाद आए इस फैसले को न्याय की बड़ी जीत माना जा रहा है। उन परिवारों के लिए यह सुकून की बात है जिन्होंने इस हिंसा में अपने अपनों को खोया था।