आजमगढ़: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत आजमगढ़ प्रशासन ने अवैध कब्जों के खिलाफ एक और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। जिले के सरायमीर थाना क्षेत्र में सरकारी जमीन (ग्राम सभा की भूमि) पर अवैध रूप से कब्जा करने और निर्माण कराने के मामले में पुलिस ने कुल 39 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद इलाके के भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारकों में हड़कंप मचा हुआ है।
मिली जानकारी के अनुसार, यह मामला सरायमीर थाना क्षेत्र के एक गांव का है, जहां लंबे समय से ग्राम सभा की सुरक्षित भूमि पर कुछ दबंगों और स्थानीय लोगों द्वारा अवैध रूप से कब्जा किया जा रहा था। राजस्व विभाग (Revenue Department) को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि सकारकारी अभिलेखों में दर्ज चारागाह, तालाब या बंजर जमीन पर अवैध पक्के निर्माण और चहारदीवारी खड़ी कर दी गई है।
जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के कड़े निर्देशों के बाद, राजस्व विभाग की टीम ने पुलिस बल के साथ मौके का मुआयना किया। पैमाइश के दौरान यह साफ हो गया कि बड़े पैमाने पर सरकारी जमीन को खुर्द-बर्द किया गया है। जांच के बाद राजस्व लेखपाल की तहरीर पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 39 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इन आरोपियों पर लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम (Prevention of Damage to Public Property Act) और आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
पुलिस का कहना है कि इन सभी लोगों को पहले भी नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन इन्होंने अवैध कब्जा नहीं हटाया। कुछ लोगों ने तो सरकारी जमीन की खरीद-फरोख्त तक करने की कोशिश की थी। अब इन सभी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जल्द ही अवैध निर्माणों पर 'बाबा का बुलडोजर' भी चल सकता है।
उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ सालों से सरकारी जमीनों को मुक्त कराने का अभियान युद्ध स्तर पर चल रहा है। आजमगढ़ में हुई यह कार्रवाई इसी कड़ी का हिस्सा है। प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो, अगर सरकारी संपत्ति पर कब्जा पाया गया, तो सख्त कार्रवाई तय है। राजस्व विभाग की टीम अब जिले के अन्य हिस्सों में भी ऐसी जमीनों की लिस्ट तैयार कर रही है जो कागजों में तो सरकारी हैं लेकिन मौके पर वहां किसी का कब्जा है।
ग्रामीण इलाकों में अक्सर देखा जाता है कि लोग जानकारी के अभाव में या दबंगई के चलते ग्राम समाज की जमीन को अपनी जागीर समझ लेते हैं। कई बार छोटे किसान अपनी मेढ़ बढ़ाते-बढ़ाते सरकारी जमीन में घुस जाते हैं। बड़े भू-माफिया फर्जी कागजात तैयार कर सरकारी जमीन को आम लोगों को बेच देते हैं, जिससे आम आदमी भी कानूनी पचड़ों में फंस जाता है।
पुलिस अब इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी और उनके पिछले रिकॉर्ड की जांच कर रही है। वहीं, राजस्व विभाग इन जमीनों को दोबारा सरकारी कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी कार्रवाई से गांव के विकास कार्यों (जैसे स्कूल या अस्पताल बनाना) के लिए जमीन उपलब्ध हो सकेगी।