बागपत: उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जहाँ एक गरीब मटका विक्रेता (Pot Seller) की अज्ञात बदमाशों ने बेरहमी से हत्या कर दी। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और स्थानीय लोगों में पुलिस प्रशासन के खिलाफ रोष व्याप्त है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाल रही है।
मृतक की पहचान एक स्थानीय मटका विक्रेता के रूप में हुई है, जो पिछले कई सालों से बागपत के विभिन्न इलाकों में घूम-घूम कर या सड़क किनारे अपनी छोटी सी दुकान लगाकर मिट्टी के बर्तन और मटके बेचकर अपने परिवार का गुजर-बसर करता था। बताया जा रहा है कि बीती रात जब वह अपनी दुकान बढ़ाकर घर की ओर जा रहा था या दुकान पर ही आराम कर रहा था, तभी अज्ञात हमलावरों ने उस पर घातक हथियारों से हमला कर दिया। सुबह जब आसपास के लोगों ने लहूलुहान हालत में शव देखा, तो तुरंत पुलिस को सूचना दी। मृतक के शरीर पर चोट के गहरे निशान मिले हैं, जो संघर्ष की ओर इशारा करते हैं।
सूचना मिलते ही बागपत पुलिस के आला अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। शुरुआती जांच में पुलिस को घटनास्थल के पास लगे एक सीसीटीवी कैमरे में कुछ संदिग्ध युवक भागते हुए दिखाई दिए हैं। पुलिस आपसी रंजिश, लूटपाट के दौरान विरोध या किसी पुराने विवाद के कोण से मामले की जांच कर रही है। मौके पर फॉरेंसिक और डॉग स्क्वायड की टीम ने भी साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस मृतक के परिजनों और आसपास के दुकानदारों से पूछताछ कर रही है ताकि हत्या की असली वजह का पता लगाया जा सके।
मृतक के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों का कहना है कि उनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। वह एक सीधा-सादा इंसान था जो केवल अपने काम से मतलब रखता था। परिवार ने पुलिस से गुहार लगाई है कि हत्यारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर उन्हें फांसी की सजा दी जाए।
बागपत और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाल के दिनों में अपराध की छिटपुट घटनाओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। एक गरीब मजदूर या छोटे व्यापारी की सुरक्षा अब एक बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पुलिस गश्त (Patrolling) बढ़ाने की सख्त जरूरत है, ताकि ऐसे जघन्य अपराधों पर लगाम लगाई जा सके।
बागपत पुलिस ने दावा किया है कि सीसीटीवी में मिले सुरागों के आधार पर जल्द ही आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर समाज को झकझोर कर रख दिया है कि आखिर एक मासूम और मेहनतकश इंसान की जान की क्या कीमत है?