बहराइच : 77वें गणतंत्र दिवस के गौरवमयी अवसर पर जनपद में राष्ट्रीय पर्व का उत्साह देर रात तक साहित्यिक रंगों में रंगा रहा। नगर पालिका परिषद बहराइच के सभागार में आयोजित भव्य कवि सम्मेलन एवं मुशायरे ने बहराइच की साझा तहजीब और देशभक्ति के जज्बे को एक सूत्र में पिरो दिया। जनपद के नामचीन रचनाकारों ने अपनी कविताओं, गजल और नज्मों के जरिए लोकतंत्र की महिमा और राष्ट्रप्रेम का जयघोष किया।
कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाते हुए इसकी अध्यक्षता प्रसिद्ध कवि रामसूरत वर्मा 'जलज' एवं गोपाल शुक्ला ने संयुक्त रूप से की। मंच का कुशल संचालन शिक्षक व प्रख्यात कवि संतोष सिंह ने अपने चिरपरिचित अंदाज में किया, जिससे श्रोता अंत तक बंधे रहे।
नगर पालिका हॉल में आयोजित इस महफिल में जनपद के प्रमुख कलमकारों ने शिरकत की। गजल की रवानगी और कविता की ओज का अनूठा संगम देखने को मिला। डॉ. मुबारक अली, अल्लन बहराइची और रईस सिद्दीक़ी बहराइची ने अपनी गजलों से वाहवाही लूटी। पी. के. प्रचण्ड, प्रदीप कुमार पाण्डेय और देशराज आज़ाद की रचनाओं ने जोश भरा। रश्मि प्रभाकर, फौक बहराइची, तिलक राम अजनबी और शाश्वत पंवार ने समसामयिक विषयों पर प्रहार किया। साथ ही किशोरी लाल एडवोकेट, तारिक बहराइची, अदील अहमद, शाहिद सईद, गुलाब चंद्र जायसवाल, वीरेश पांडे, लक्ष्मीकांत त्रिपाठी, सुनील, नजर बहराइची और सोमेश सावन ने अपनी कालजयी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम के समापन सत्र में नगर पालिका परिषद बहराइच के अध्यक्ष प्रतिनिधि श्यामकरन टेकड़ीवाल ने सभी आमंत्रित कवियों और शायरों का सम्मान किया। उन्होंने साहित्यकारों को अंगवस्त्र और मिष्ठान भेंट कर सम्मानित करते हुए कहा कि कवि और शायर समाज का दर्पण होते हैं और देश की एकता बनाए रखने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
इस अवसर पर अधिशासी अधिकारी (EO) नगर पालिका परिषद प्रमिता सिंह सहित विभाग के कई अधिकारी, कर्मचारी और नगर के गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। बड़ी संख्या में जुटे प्रबुद्ध श्रोताओं ने हर रचना पर तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।