बहराइच : केंद्र सरकार द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) बिल में किए गए संशोधनों को लेकर सवर्ण समाज का गुस्सा अब सड़कों पर फूट पड़ा है। मंगलवार को बहराइच जनपद में एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला, जब विभिन्न सवर्ण संगठनों और राजनैतिक दलों ने एकजुट होकर जिला मुख्यालय का घेराव किया। हजारों की संख्या में पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे "काला कानून" करार दिया।
प्रदर्शन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि परशुराम सेना, क्षत्रिय महासभा, जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) और सर्व समाज के बैनर तले हजारों लोग जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को कलेक्ट्रेट परिसर में भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। पुलिस अधिकारी लगातार प्रदर्शनकारियों को शांत कराने और बैरिकेडिंग के पीछे रखने का प्रयास करते रहे, लेकिन आक्रोशित जनता के नारों के सामने प्रशासन बेबस नजर आया।
प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ बेहद तीखी नारेबाजी हुई। प्रदर्शनकारियों ने "हर हर मोदी सवर्ण विरोधी" और "केंद्र सरकार की तानाशाही नहीं चलेगी" जैसे नारे लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे दिग्गज नेताओं— जनसत्ता दल के अध्यक्ष देवानंद सिंह, क्षत्रिय महासभा के जितेंद्र सिंह और परशुराम सेना प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ तिवारी ने संयुक्त रूप से कहा कि सवर्ण समाज ने हमेशा भारतीय जनता पार्टी को मजबूती दी है, लेकिन सरकार ने बदले में उनके हितों के साथ खिलवाड़ करने वाला बिल पेश किया है।
प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में निम्नलिखित प्रमुख बिंदु उठाए गए सरकार नए संशोधनों के जरिए सवर्ण समाज के युवाओं के भविष्य के साथ भेदभाव कर रही है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि यह कानून सामाजिक ताने-बाने और सद्भाव को बिगाड़ने वाला है। बिल को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए, अन्यथा यह विरोध राष्ट्रव्यापी आंदोलन का रूप ले लेगा।
आंदोलन में शामिल लोगों ने भावनात्मक नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि सवर्ण समाज भाजपा का कोर वोटर रहा है, लेकिन अब उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है कि उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपनी हठधर्मी नहीं छोड़ी और इस "काले कानून" को वापस नहीं लिया, तो आने वाले चुनावों में इसका गंभीर परिणाम भुगतना पड़ेगा।
बहराइच में हुआ यह शक्ति प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि यूजीसी बिल का मुद्दा अब केवल अकादमिक गलियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। शाम तक चले इस प्रदर्शन के बाद भी कार्यकर्ताओं में भारी जोश देखा गया। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार इस बढ़ते विरोध पर क्या प्रतिक्रिया देती है।