बहराइच जिले में वर्षों से लंबित बहराइच–जरवल रोड नई रेल लाइन परियोजना अब ज़मीन पर उतरती दिखाई दे रही है। लगभग 530 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस रेल लाइन के लिए 62 गांवों की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
यह रेल लाइन बहराइच, कैसरगंज, फखरपुर और जरवल क्षेत्र से होकर गुजरेगी। प्रशासनिक स्तर पर संबंधित गांवों में नाप-जोख, खसरा सत्यापन और किसानों से संपर्क का काम तेज कर दिया गया है।
जिन गांवों से रेल लाइन गुजरेगी, वहां राजस्व टीम खेतों की माप कर रही है । किसानों से दस्तावेज़ और स्वामित्व विवरण मांगे जा रहे हैं। मुआवज़े की दर को लेकर गांव-गांव चर्चा और बैठकों का दौर चल रहा है।
किसानों का कहना है कि अगर बाज़ार दर के अनुसार मुआवज़ा मिला, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। वहीं कुछ गांवों में यह आशंका भी जताई जा रही है कि “खेती की ज़मीन गई तो रोज़गार का क्या होगा?”
रेलवे की प्रारंभिक योजना के अनुसार जरवल कसबा, कैसरगंज और फखरपुर और परसेंडी शुगर मिल (हाल्ट) स्टेशन बनेगा । इस लाइन के बनने से बहराइच से लखनऊ और मध्य यूपी की सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी, किसानों को माल ढुलाई में सुविधा होगी , क्षेत्र में रोज़गार और व्यापार के नए अवसर मिलेंगे।
रेल लाइन बिछाने के लिए कैसरगंज तहसील के इन गांवों की भूमि ली जाएगी - टेंड़वा महंत, हैबतपुर, पंदूर, घासीपुर, दतौली, खपुरवा, टेंड़वा अल्पी मिश्र सहित कुल 18 गांव इस परियोजना से प्रभावित होंगे। इन गांवों में राजस्व टीम द्वारा खेतों की नाप-जोख और अभिलेख सत्यापन की तैयारी की जा रही है। वहीँ बहराइच तहसील क्षेत्र से अमीनपुर नगरौर, नगरौर, मसीहाबाद, गोकुलपुर, गुदुआपुर समेत कुल 24 गांवों के किसानों की जमीन अधिग्रहण में शामिल की गई है।
इसको लेकर अधिग्रहित अधिकारी/सिटी मजिस्ट्रेट ने कवायद भी शुरू कर दी है। 2027 तक इसके चालू होने की उम्मीद है। जैसे ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होगी, रेलवे द्वारा निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। प्रशासन का दावा है कि सभी प्रभावित गांवों के किसानों को नियमों के अनुसार मुआवज़ा दिया जाएगा।