बहराइच: जिले में पिछले कुछ दिनों से तेंदुए का आतंक चरम पर है। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग और उससे सटे ग्रामीण इलाकों में हिंसक वन्य जीवों के हमलों ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। पिछले 48 घंटों में तेंदुए ने अलग-अलग गांवों में हमला कर कई लोगों को घायल कर दिया है, वहीं वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरों ने भी इस 'पकड़-पकड़' के खेल में दिलचस्प मोड़ ला दिए हैं।
बाइक सवार की सूझबूझ से बची जान
पहली घटना बहराइच के मुख्य मार्ग की है, जहाँ एक बाइक सवार युवक अपनी मंज़िल की ओर बढ़ रहा था। तभी अचानक झाड़ियों में घात लगाए बैठे तेंदुए ने उस पर छलांग लगा दी। तेंदुए के पंजों से युवक के कपड़े फट गए, लेकिन युवक ने हिम्मत नहीं हारी। उसने शोर मचाना शुरू किया और बाइक की रफ़्तार बढ़ा दी। युवक की चीख-पुकार सुनकर आसपास के खेतों में काम कर रहे लोग दौड़े, जिसके बाद तेंदुआ वापस जंगल की ओर भाग गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अगर युवक समय पर शोर न मचाता, तो तेंदुआ उसे घसीटकर जंगल में ले जा सकता था।
ककरहा रेंज: सिर पर वार कर किया अधमरा
बहराइच के मिहींपुरवा और मोतीपुर इलाके के अंतर्गत आने वाले ककरहा रेंज के करियाकोट गांव में एक और खौफनाक वारदात हुई। यहाँ एक व्यक्ति अपने घर के पास काम कर रहा था, तभी तेंदुए ने पीछे से हमला कर दिया। तेंदुए ने सीधे व्यक्ति के सिर पर अपने नुकीले पंजों से वार किया। हमले में व्यक्ति के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आई हैं। घायल को तत्काल मिहींपुरवा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहाँ उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। इस घटना के बाद करियाकोट के ग्रामीणों में वन विभाग के खिलाफ भारी रोष देखा जा रहा है।
पिंजरे की पहेली: तेंदुआ पकड़ने के लिए लगाया चारा, फंसी बिल्ली
शिवपुर इलाके में एक अजीबो-गरीब घटना सामने आई। वन विभाग ने ग्रामीणों की शिकायत पर तेंदुए को पकड़ने के लिए एक लोहे का बड़ा पिंजरा लगाया था। पिंजरे के अंदर तेंदुए को ललचाने के लिए शिकार रखा गया था। सुबह जब ग्रामीण उम्मीद के साथ पिंजरे के पास पहुँचे, तो वहां का नज़ारा देख हैरान रह गए। पिंजरे में तेंदुए की जगह एक पालतू बिल्ली कैद मिली। इस घटना ने एक तरफ जहाँ लोगों को हंसने पर मजबूर किया, वहीं दूसरी तरफ वन विभाग की निगरानी पर भी सवाल खड़े किए। हालांकि, वन विभाग की टीम का कहना है कि वे लगातार इलाके की मॉनिटरिंग कर रहे हैं और पदचिह्नों के आधार पर तेंदुए की लोकेशन ट्रेस की जा रही है।
बड़ी कामयाबी: गौड़िया गांव में पिंजरे में कैद हुआ खूंखार तेंदुआ
लगातार मिल रही नाकामियों के बीच वन विभाग को गौड़िया गांव में बड़ी सफलता हाथ लगी। यहाँ कई दिनों से तेंदुआ पालतू मवेशियों को अपना निवाला बना रहा था। वन विभाग की टीम ने गाँव के किनारे गन्ने के खेत के पास पिंजरा लगाया था। बीती रात शिकार की तलाश में निकला तेंदुआ आखिरकार जाल में फंस गया। सुबह जब ग्रामीणों ने तेंदुए के दहाड़ने की आवाज़ सुनी, तो मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। वन विभाग की टीम ने तेंदुए को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया है, जिससे गौड़िया और आसपास के गाँवों ने राहत की सांस ली है।
ग्रामीणों में खौफ, प्रशासन की अपील
बहराइच के इन इलाकों में तेंदुए के बढ़ते हमलों ने स्थानीय प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। डीएफओ (DFO) के निर्देशानुसार प्रभावित क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी गई है। वन विभाग ने ग्रामीणों के लिए एडवाइजरी जारी की है, शाम ढलने के बाद या भोर के समय खेतों की ओर अकेले न जाएं। यदि बाहर जाना अनिवार्य हो, तो कम से कम 4-5 लोग एक साथ लाठी-डंडा लेकर निकलें। अंधेरे में चलते समय मोबाइल पर गाने चलाएं या आपस में बात करते रहें, ताकि शोर सुनकर जंगली जानवर दूर रहें। तेंदुआ अक्सर गन्ने के घने खेतों में छिपकर हमला करता है, इसलिए इन खेतों के पास जाने से बचें।
निष्कर्ष
बहराइच में वन्यजीव और इंसानों के बीच का यह संघर्ष पुराना है, लेकिन हालिया घटनाओं ने सुरक्षा इंतज़ामों की पोल खोल दी है। हालांकि एक तेंदुए के पकड़े जाने से गौड़िया गाँव में राहत है, लेकिन ककरहा और मिहींपुरवा के जंगलों में अब भी कई अन्य तेंदुए सक्रिय हैं। वन विभाग को चाहिए कि वे थर्मल ड्रोन और अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर इन आदमखोरों को जल्द से जल्द काबू में करें ताकि और किसी मासूम की जान न जाए।