बहराइच: बहराइच-जरवल रोड नई रेल लाइन के लिए जमीन देने वाले किसानों की धड़कनें तेज हो गई हैं। पिछले दिनों सांसद आनंद गौड़ द्वारा कलेक्ट्रेट में किए गए ऐतिहासिक धरने और प्रशासन को दिए गए अल्टीमेटम के बावजूद, अभी तक मुआवजे की दरों को लेकर कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं हुआ है। यही कारण है कि आज बहराइच शहर और प्रभावित 62 गांवों के लोग इस खबर को लेकर सबसे ज्यादा परेशान हैं।
सांसद आनंद गौड़ ने कलेक्ट्रेट में हजारों समर्थकों के साथ हुंकार भरते हुए प्रशासन को चेताया था कि किसानों को सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा मिलना चाहिए। उस दौरान प्रशासन ने फाइलों को जल्द निस्तारित करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब ग्रामीण पूछ रहे हैं कि उस वादे का क्या हुआ?
लोगों में इस बात को लेकर सबसे ज्यादा डर है कि कहीं प्रशासन चुपचाप पुराने रेट पर ही अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू न कर दे। सूत्रों के अनुसार, कई गांवों में लेखपाल और राजस्व की टीमें सर्वे के लिए पहुँच रही हैं, जिसका ग्रामीण दबे स्वर में विरोध कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब तक हमारे सांसद द्वारा उठाई गई मांगों पर लिखित आदेश नहीं आता, तब तक हम अपनी जमीन का इंच भर हिस्सा नहीं देंगे।
शहर की चर्चाओं में आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि सांसद आनंद गौड़ अब अगला कदम क्या उठाएंगे? क्या वे इस मामले को लेकर फिर से सड़कों पर उतरेंगे या फिर सीधे रेल मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग करेंगे? सांसद कार्यालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि वे लगातार रेल विभाग के संपर्क में हैं और किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं होने देंगे।
यदि मुआवजा विवाद नहीं सुलझा, तो 2027 तक रेल चलाने का रेलवे का सपना अधूरा रह सकता है। 530 करोड़ का बजट होने के बावजूद जमीन का कब्जा न मिलना प्रोजेक्ट में देरी का बड़ा कारण बन सकता है।