उतरौला (बलरामपुर) : नगर के ऐतिहासिक संस्थान दारूल उलूम अहले सुन्नत ज़ियाउल इस्लाम जामा मस्जिद में सत्र समाप्ति के अवसर पर एक भव्य 'दस्तारबंदी समारोह' का आयोजन किया गया। इस गौरवशाली कार्यक्रम में शिक्षा पूरी करने वाले कुल 24 छात्रों को दस्तार (पगड़ी) बांधी गई और उन्हें सनद (डिग्री) प्रदान कर सम्मानित किया गया।
24 छात्रों की दस्तारबंदी और नाते-पाक की गूँज
यह गरिमामयी जलसा प्रिंसिपल मौलाना मेराजुद्दीन खां और प्रबंधक डॉ. मुबारक अहमद की देखरेख में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में 11 आलिम व फाजिल, 9 हाफिज-ए-कुरान और 4 कारी सहित कुल 24 छात्रों की दस्तारबंदी की गई। इस दौरान मशहूर नातिया शायरों राही बस्तवी और सोहेल जाफराबादी सहित अन्य ने अपनी 'नाते पाक' से समां बांध दिया।
तालीम के बिना इंसान का कोई रुतबा नहीं: मुफ्ती अरसलान रज़ा
मुख्य अतिथि मुफ्ती अरसलान रज़ा खान बरेलवी ने छात्रों को संबोधित करते हुए शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "तालीम ही वह ज़रिया है जिससे इंसान का रुतबा बनता है। उतरौला का यह मदरसा देश भर के छात्रों को शिक्षित कर समाज सेवा के लिए तैयार कर रहा है।" उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे अपनी शिक्षा का उपयोग समाज की भलाई और देश के विकास के लिए करें।
मानवता की सेवा ही शिक्षा का असली उद्देश्य
मुफ्ती गुलाम जिलानी अजहरी और मौलाना अरबाब फारुकी ने अपने संबोधन में कहा कि मदरसे केवल ज्ञान के केंद्र नहीं, बल्कि मानवता के निर्माण की पाठशाला हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा तभी सार्थक है जब वह किसी जरूरतमंद के काम आए। जलसे के अंत में देश की तरक्की, अमन-चैन और खुशहाली के लिए विशेष दुआ मांगी गई।
कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य लोग रहे मौजूद
इस सफल आयोजन में हाफिज अब्दुल दय्यान, मास्टर आफाक अहमद, कारी अब्दुल हक और मौलाना रमजान अली सहित कई शिक्षकों और प्रबुद्ध जनों ने सहयोग किया। कार्यक्रम में उतरौला नगर और आस-पास के क्षेत्रों से भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।