मंगलवार, 17 मार्च 2026
बाराबंकी

ईरान के सर्वोच्च नेता खमेनेई की मौत से बाराबंकी के इस गांव में मातम, गहरा है 'खमैनी' खानदान का नाता

By Uttar World Desk

04 मा, 2026 | 07:54 बजे
ईरान के सर्वोच्च नेता खमेनेई की मौत से बाराबंकी के इस गांव में मातम, गहरा है 'खमैनी' खानदान का नाता

बाराबंकी : ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध की तपिश अब उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले तक पहुँच गई है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खमेनेई की एक हमले में हुई मौत के बाद, बाराबंकी के किंतूर (Kintoor) गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। आपको जानकर हैरानी होगी कि ईरान के पहले सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रुहोल्ला खमैनी के दादा का जन्म इसी गांव में हुआ था।

1. किंतूर गांव और खमैनी का पुश्तैनी रिश्ता

बाराबंकी जिले का किंतूर गांव कोई साधारण गांव नहीं है। इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि ईरान की इस्लामी क्रांति के जनक अयातुल्ला रुहोल्ला खमैनी के दादा, सैयद अहमद मूसवी हिंदी, इसी किंतूर गांव में पैदा हुए थे। साल 1834 में वह धार्मिक यात्रा पर ईरान गए और वहीं बस गए। इसी जुड़ाव के कारण, किंतूर के लोग आज भी खुद को खमैनी के खानदान से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं।

2. एक हफ्ते के शोक का ऐलान, घरों पर लगे काले झंडे

इजरायल और अमेरिका के कथित हमले में अली खमेनेई की मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया। ग्रामीणों ने एक सप्ताह के शोक का ऐलान किया है। गांव के कई घरों की छतों पर विरोध और दुख के प्रतीक के रूप में काले झंडे लगा दिए गए हैं। किंतूर के निवासियों का कहना है कि उन्होंने न केवल एक महान धार्मिक नेता को खोया है, बल्कि अपने पुरखों की विरासत के एक रक्षक को भी खो दिया है।

3. इस बार नहीं मनेगी होली: हिंदू-मुस्लिम साथ मिलकर मना रहे शोक

किंतूर गांव की खूबसूरती यह है कि यहाँ हिंदू और मुसलमान हमेशा से भाईचारे के साथ रहते आए हैं। गांव के निवासी राकेश कुमार और सैयद रेहान काज़मी के अनुसार, गांव वालों ने तय किया है कि वे इस बार होली का त्योहार नहीं मनाएंगे। गांव के मंदिर और मस्जिद, दोनों जगहों पर शांति की दुआएं मांगी जा रही हैं। लोग इजरायल-ईरान संघर्ष को मानवता के लिए खतरा बता रहे हैं।

4. AMU में भी दी गई 'शहादत' की सलामी

सिर्फ बाराबंकी ही नहीं, बल्कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के छात्रों ने भी खमेनेई की याद में जनाजे की नमाज (गायबाना नमाज-ए-जनाजा) अदा की। छात्रों और वक्ताओं ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह इस दुख की घड़ी में आधिकारिक संवेदना व्यक्त करें।

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