मंगलवार, 17 मार्च 2026
बरेली

बरेली के मोहम्मदगंज में 'मकान बिकाऊ है' के पोस्टरों से हड़कंप, पलायन की खबरों के बीच जुमे पर भारी सुरक्षा बल तैनात

By Uttar World Desk

20 फ़र, 2026 | 09:06 बजे
बरेली के मोहम्मदगंज में 'मकान बिकाऊ है' के पोस्टरों से हड़कंप, पलायन की खबरों के बीच जुमे पर भारी सुरक्षा बल तैनात

बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले का मोहम्मदगंज गांव इन दिनों सुर्खियों में है। गांव के कई हिंदू घरों के बाहर 'यह मकान बिकाऊ है' के पोस्टर लगने के बाद इलाके में तनाव फैल गया है। पलायन की इन खबरों ने जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में खलबली मचा दी है। शुक्रवार (20 फरवरी 2026) को जुमे की नमाज के मद्देनजर गांव में स्थिति बेहद संवेदनशील रही, जिसे देखते हुए प्रशासन ने पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुक्रवार का दिन शांतिपूर्ण जरूर रहा, लेकिन ग्रामीणों के मन में डर और नाराजगी अब भी बरकरार है।

क्या है पूरा विवाद?

मोहम्मदगंज गांव में हिंदू और मुस्लिम आबादी के बीच पिछले कुछ समय से तनाव की स्थिति बनी हुई है। हिंदू परिवारों का आरोप है कि दूसरे समुदाय के कुछ दबंग लोग उन्हें परेशान कर रहे हैं और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि सुरक्षा और सम्मान की कमी के कारण वे अब इस गांव में रहने को तैयार नहीं हैं, इसीलिए उन्होंने अपने घरों के बाहर 'मकान बिकाऊ है' के पोस्टर लगा दिए हैं। यह मामला तब और गरमा गया जब सोशल मीडिया पर इन पोस्टरों की तस्वीरें वायरल हो गईं।

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए बरेली के जिलाधिकारी (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने गांव का दौरा किया। पुलिस ने ग्रामीणों को सुरक्षा का भरोसा दिलाया है और उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है। शुक्रवार को गांव में शांति बनाए रखने के लिए पीएसी (PAC) और स्थानीय पुलिस की कई टीमें तैनात की गईं। अधिकारियों ने दोनों समुदायों के संभ्रांत लोगों के साथ बैठक की और शांति बनाए रखने की अपील की। पुलिस का कहना है कि कुछ लोग आपसी विवाद को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं, जिनकी पहचान की जा रही है।

पलायन या दबाव की राजनीति?

विपक्ष और कई हिंदू संगठनों ने इस मामले को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। वहीं, प्रशासन का तर्क है कि यह पलायन नहीं बल्कि कुछ स्थानीय विवादों का नतीजा है जिसे सुलझाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, घरों की दीवारों पर लिखे 'मकान बिकाऊ है' के शब्द प्रशासन के दावों को चुनौती दे रहे हैं। फिलहाल गांव में शांति है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होता और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होती, वे इन पोस्टरों को नहीं हटाएंगे।

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