बस्ती । यूपी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति को ठेंगा दिखाते हुए बस्ती जनपद के गौर विकास खंड में मनरेगा कार्यों में बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप लगा है। सिटकोहर सरनागी, मदनपुरा और विशुनपुर सरनागी जैसे गांवों में भ्रष्टाचार का ऐसा जाल बुना गया है, जहाँ मौके पर काम नदारद है लेकिन ऑनलाइन पोर्टल पर लाखों का भुगतान और मजदूरों की उपस्थिति दर्ज है।
स्थानीय ग्रामीणों ने इस फर्जीवाड़े का कच्चा चिट्ठा खोलते हुए आरोप लगाया है कि जिन स्थानों पर मिट्टी खुदाई, तालाब निर्माण और चकमार्ग बनाने के नाम पर सरकारी धन का आहरण (भुगतान) दर्शाया गया है, वहाँ हकीकत में एक फावड़ा तक नहीं चला। ग्रामीणों का दावा है कि सैकड़ों मजदूरों के नाम पर फर्जी मस्टर रोल भरकर सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है।
मामले के तूल पकड़ने पर मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) ने आश्वासन दिया है कि साक्ष्य उपलब्ध होने पर जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने संदिग्ध मस्टर रोल को निरस्त करने की भी बात कही है। यही बात गौर के खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) ने भी दोहराई है।
हालांकि, इस पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या केवल मस्टर रोल निरस्त कर देना भ्रष्टाचार का समाधान है? यदि फर्जी भुगतान हो चुका है, तो संबंधित पंचायत सचिव, रोजगार सेवक और तकनीकी सहायक (TA) पर जिम्मेदारी कब तय होगी?
भ्रष्टाचार के इस खेल से नाराज ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच केवल कागजों की लीपापोती तक सीमित न रहे। उनकी मांग है कि भुगतान और मजदूरों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कराया जाए। मौके पर जाकर देखा जाए कि क्या वास्तव में कार्य हुआ है। दोषियों से सरकारी धन की रिकवरी की जाए और उन पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई हो।