मंगलवार, 17 मार्च 2026
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मौत के साये से लौटीं ईशा गुप्ता: अबू धाबी एयरपोर्ट पर आंखों के सामने दिखे मिसाइल धमाके; रोते अजनबियों और अफरा-तफरी की अनसुनी कहानी!

By Uttar World Desk

03 मा, 2026 | 02:56 बजे
मौत के साये से लौटीं ईशा गुप्ता: अबू धाबी एयरपोर्ट पर आंखों के सामने दिखे मिसाइल धमाके; रोते अजनबियों और अफरा-तफरी की अनसुनी कहानी!

मुंबई : ईरान-इज़राइल युद्ध के बीच खाड़ी देशों में फंसे हजारों भारतीयों के लिए दुआओं का दौर जारी है, लेकिन इस बीच बॉलीवुड अभिनेत्री ईशा गुप्ता (Esha Gupta) के लिए राहत की खबर है। ईशा सुरक्षित रूप से भारत वापस लौट आई हैं। ईशा ने भारत पहुँचते ही अबू धाबी एयरपोर्ट पर बिताए उन खौफनाक घंटों का दर्दनाक मंजर साझा किया है, जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो सकते हैं।

ईशा ने बताया कि वह 28 फरवरी (रविवार) को अबू धाबी एयरपोर्ट पर थीं। अचानक दोपहर 1 बजे पूरे एयरपोर्ट को बंद कर दिया गया। किसी को नहीं पता था कि क्या हुआ है। चारों तरफ बस खौफ और अफरा-तफरी थी। ईशा के शब्दों में— "कोई नहीं जानता था कि अगले मिनट हमारे साथ क्या होने वाला है।"

जैसे ही मोबाइल पर मिसाइल हमलों और हवाई क्षेत्र बंद होने की खबरें आईं, एयरपोर्ट पर मौजूद लोग एक-दूसरे को गले लगकर ढांढस बंधाने लगे। अजनबी लोग एक-दूसरे का सहारा बन रहे थे और हर कोई अपने घर फोन करके अपनों की सलामती की दुआ कर रहा था। ईशा ने बताया कि वह मंजर बहुत ही डरावना और भावुक करने वाला था।

ईशा ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) प्रशासन की तारीफ करते हुए कहा कि इतनी बड़ी आपदा के बावजूद वहां की पुलिस और ग्राउंड स्टाफ बहुत शांत था। फंसे हुए यात्रियों को तुरंत खाने के लिए पैसे (Cash) दिए गए और बसों के जरिए शहर के अलग-अलग होटलों में शिफ्ट किया गया। ईशा के फोन पर लगातार 'MOI' (गृह मंत्रालय) के नोटिफिकेशन आ रहे थे, जो उन्हें सुरक्षित रहने और शेल्टर लेने की सलाह दे रहे थे।

ईशा गुप्ता कल (2 मार्च) एतिहाद (Etihad) की पहली कमर्शियल फ्लाइट से दिल्ली लैंड हुईं। उन्होंने भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रिया अदा किया कि उन्होंने फंसे हुए नागरिकों को निकालने के लिए कूटनीतिक स्तर पर काम किया। ईशा के साथ ही सोनल चौहान और बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु भी उसी संकट के बीच वहां फंसी हुई थीं।

ईशा गुप्ता की यह कहानी सिर्फ एक सेलिब्रिटी की दास्तान नहीं है, बल्कि उन हजारों भारतीयों की आवाज है जो आज भी खाड़ी देशों में फंसे हैं। युद्ध की विभीषिका में फंसे लोगों के लिए यह खबर एक उम्मीद की किरण है कि सुरक्षित घर वापसी संभव है।

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