नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में शहरी विकास को लेकर एक क्रांतिकारी कदम उठाया गया है। सरकार ने 'अर्बन चैलेंज फंड' के माध्यम से 1 लाख करोड़ रुपये का बूस्ट देने का निर्णय लिया है। इस फंड का मुख्य उद्देश्य भारतीय शहरों में बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाना और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है।
क्या है 'अर्बन चैलेंज फंड'?
यह एक अनोखा फंड है जो 'कंपटीशन' (Challange) के आधार पर राज्यों और शहरों को दिया जाएगा।
कंपटीशन मॉडल: शहर अपने विकास की योजनाएं (जैसे कचरा प्रबंधन, जल आपूर्ति, या डिजिटल इंफ्रा) बनाकर केंद्र को भेजेंगे।
फंडिंग: जो शहर सबसे इनोवेटिव और टिकाऊ (Sustainable) मॉडल पेश करेंगे, उन्हें इस 1 लाख करोड़ के फंड से वित्तीय सहायता दी जाएगी।
किन क्षेत्रों पर होगा फोकस?
इस फंड का इस्तेमाल निम्नलिखित क्षेत्रों में आधुनिक सुधार के लिए किया जाएगा:
स्मार्ट ट्रांसपोर्ट: शहरों में इलेक्ट्रिक बसें, मेट्रो विस्तार और जाम मुक्त सड़कों का निर्माण।
वेस्ट मैनेजमेंट: कचरे से ऊर्जा (Waste-to-Energy) बनाने वाले आधुनिक प्लांट लगाना।
वॉटर सिक्योरिटी: 24x7 स्वच्छ जल आपूर्ति और जल निकासी व्यवस्था में सुधार।
डिजिटल गवर्नेंस: नागरिक सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाना।
नेक्स्ट-जेन इंफ्रा: शहरों में अधिक ग्रीन पार्क, वॉकिंग ट्रैक और प्रदूषण कम करने वाली तकनीकों का उपयोग।
राज्यों के लिए बड़ा मौका
इस फंड के जरिए केंद्र सरकार चाहती है कि राज्यों के बीच अपने शहरों को बेहतर बनाने की होड़ लगे। इससे न केवल बड़े महानगरों बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों का भी तेजी से विकास होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की GDP में शहरों के योगदान को बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगा।