मालवीय नगर (नई दिल्ली): मालवीय नगर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने एक बार फिर महानगरों में होने वाले नस्ली भेदभाव (Racial Abuse) के मुद्दे को गरमा दिया है। अरुणाचल प्रदेश की तीन युवतियों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार और नस्ली टिप्पणी करने के मामले में अब एक नया मोड़ आया है। दिल्ली पुलिस की लगातार कार्रवाई के बाद, आरोपी पति-पत्नी अब आधिकारिक तौर पर पुलिस जांच में शामिल हो गए हैं।
यह घटना दिल्ली के मालवीय नगर इलाके की है, जहाँ उत्तर-पूर्व (North-East) की तीन लड़कियां रहती हैं। मिली जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत बहुत ही मामूली बात से हुई थी। बताया जा रहा है कि युवतियों के घर के पास रहने वाले एक दंपत्ति (पति-पत्नी) के साथ उनका झगड़ा तब शुरू हुआ जब कथित तौर पर ऊपर से कुछ धूल या कचरा नीचे गिर गया।
देखते ही देखते यह मामूली बहस एक बड़े विवाद में तब्दील हो गई। पीड़ित लड़कियों का आरोप है कि आरोपी पति-पत्नी ने न केवल उनके साथ गाली-गलौज की, बल्कि उनकी नस्ल और उनके मूल स्थान को लेकर बेहद आपत्तिजनक और नस्ली टिप्पणियां भी कीं। लड़कियों ने आरोप लगाया कि उन्हें "बाहरी" कहा गया और उन पर ऐसी टिप्पणियां की गईं जो सीधे तौर पर उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाती हैं।
सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो वायरल होने और लड़कियों द्वारा औपचारिक शिकायत दर्ज कराने के बाद दिल्ली पुलिस हरकत में आई। पुलिस ने आईपीसी (IPC) की संबंधित धाराओं और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया।
शुरुआती दौर में आरोपी पक्ष पुलिस के सामने आने से बच रहा था, लेकिन कानूनी दबाव बढ़ने के बाद अब वे जांच में शामिल होने के लिए मालवीय नगर थाने पहुंचे हैं। पुलिस अब दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर रही है और उस वीडियो की भी जांच की जा रही है जो घटना के समय बनाया गया था।
मालवीय नगर की यह घटना कोई पहली बार नहीं है। दिल्ली जैसे महानगर में उत्तर-पूर्व के लोगों के साथ होने वाला भेदभाव एक पुरानी और गंभीर समस्या रही है। अक्सर लोग उत्तर-पूर्व की संस्कृति और पहनावे को लेकर पूर्वाग्रह (Prejudice) रखते हैं। सरकार ने 2014 के 'बेज़बरुआ समिति' (Bezbaruah Committee) की सिफारिशों के बाद कड़े कानून बनाए हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर आज भी संवेदनशीलता की कमी है। आज के समय में सोशल मीडिया की वजह से ऐसी घटनाएं तुरंत सामने आ जाती हैं, जिससे पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ जाती है।
जांच में शामिल होने पहुंचे पति-पत्नी का कहना है कि उनकी मंशा नस्ली भेदभाव करने की नहीं थी। उनका दावा है कि विवाद केवल सफाई और शोर-शराबे को लेकर था। हालांकि, पुलिस का कहना है कि वे हर पहलू की बारीकी से जांच कर रहे हैं और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
एक तरफ हम भारत को 'विश्व गुरु' बनाने की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ अपने ही देश के नागरिकों को उनकी शक्ल या इलाके के आधार पर भेदभाव का शिकार बनाना शर्मनाक है। दिल्ली पुलिस का इस मामले में तुरंत एक्शन लेना सराहनीय है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ FIR दर्ज करने से मानसिकता बदलेगी?
शिक्षा और जागरूकता ही एकमात्र रास्ता है जिससे इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है। दिल्ली में रहने वाले हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वे उत्तर-पूर्व से आए अपने भाई-बहनों को सुरक्षित महसूस कराएं।
पुलिस अब इस मामले में चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है। अगर नस्ली टिप्पणी के आरोप सही पाए जाते हैं, तो आरोपियों को कड़ी जेल की सजा हो सकती है। पीड़ित युवतियों ने मांग की है कि उन्हें न्याय मिले ताकि भविष्य में किसी और लड़की के साथ ऐसा व्यवहार न हो।