देवरिया: उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के बाजारों में इन दिनों एक ऐसा 'काला खेल' चल रहा है जो न केवल आपकी जेब काट रहा है, बल्कि आपकी और आपके परिवार की सेहत के साथ भी खिलवाड़ कर रहा है। बाजार में नामी कंपनियों के जिस खाने वाले तेल (Edible Oil) की कीमत 230 रुपये प्रति लीटर है, वही तेल कुछ दुकानों पर धड़ल्ले से 150 रुपये में बेचा जा रहा है। सवाल यह है कि आखिर 80 रुपये का यह भारी अंतर कैसे संभव है? क्या यह मिलावटखोरी का कोई नया और बड़ा नेटवर्क है?
मिली जानकारी के अनुसार, देवरिया के ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में कुछ सिंडिकेट सक्रिय हैं। ये लोग नामी ब्रांड्स की खाली बोतलों या उनके जैसी दिखने वाली हूबहू पैकिंग का इस्तेमाल करते हैं। असली रिफाइंड या सरसों के तेल में बेहद घटिया दर्जे का पाम ऑयल या राइस ब्रान ऑयल मिलाया जा रहा है। पैकिंग इतनी सफाई से की जाती है कि एक आम ग्राहक के लिए असली और नकली में फर्क करना लगभग नामुमकिन हो जाता है।150 रुपये की 'सस्ती डील' देखकर मिडिल क्लास और गरीब तबके के लोग भारी मात्रा में यह तेल खरीद रहे हैं, यह सोचे बिना कि यह सस्तापन उनकी जान पर भारी पड़ सकता है।
डॉक्टरों और विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मिलावटी तेल का सेवन हार्ट अटैक, लिवर की समस्या और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का कारण बन सकता है। पाम ऑयल का अत्यधिक उपयोग शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को खतरनाक स्तर तक बढ़ा देता है।
देवरिया के जागरूक नागरिकों ने खाद्य सुरक्षा विभाग (Food Safety Department) से इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है। हालांकि पुलिस और प्रशासन समय-समय पर छापेमारी करते हैं, लेकिन यह 'तेल माफिया' हर बार नए तरीके से बाजार में सक्रिय हो जाता है।
अगर कोई ब्रांडेड चीज मार्केट रेट से बहुत ज्यादा सस्ती मिल रही है, तो समझ जाइये कि कुछ गड़बड़ है। हमेशा बोतल की सील और उस पर छपी एक्सपायरी डेट की प्रिंटिंग क्वालिटी चेक करें। हमेशा खरीदारी का पक्का बिल लें ताकि शिकायत करने पर आपके पास सबूत रहे। देवरिया में चल रहा तेल का यह खेल न केवल आर्थिक अपराध है, बल्कि यह एक सामूहिक हत्याकांड की साजिश जैसा है। प्रशासन को चाहिए कि वह जल्द से जल्द उन ठिकानों पर छापेमारी करे जहाँ यह मौत का सामान तैयार हो रहा है।