एटा: जिले में घरेलू और कमर्शियल गैस (LPG) की भारी किल्लत ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। जहाँ एक तरफ रेस्टोरेंट और होटलों के चूल्हे ठंडे पड़ने लगे हैं, वहीं जिले के प्रसिद्ध 'घुंघरू-घंटी' उद्योग (ODOP) पर भी इस संकट की मार पड़ रही है। स्थिति यह है कि दुकानदार अपने प्रतिष्ठान बंद करने की कगार पर पहुँच गए हैं।
कमर्शियल गैस की किल्लत का सीधा असर स्थानीय बाजारों पर दिख रहा है। जिले के कई होटल और ढाबा संचालकों का कहना है कि सिलेंडर न मिलने के कारण वे ग्राहकों को सेवाएं नहीं दे पा रहे हैं। विकल्प के तौर पर लोग अब बिजली के हीटर या पुराने लकड़ी-कोयले के चूल्हों की ओर लौटने को मजबूर हैं, जिससे लागत बढ़ रही है और काम धीमा हो गया है।
एटा की पहचान और 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) योजना के तहत आने वाले जलेसर के घुंघरू-घंटी उद्योग पर भी गैस संकट का गहरा असर पड़ा है। इन उत्पादों को तैयार करने वाली भट्टियों में गैस का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है। आपूर्ति बाधित होने से उत्पादन ठप होने लगा है, जिससे हजारों कारीगरों की रोजी-रोटी पर संकट मंडरा रहा है।
एटा के उपभोक्ताओं का आरोप है कि एक तरफ तो वे गैस के लिए दर-दर भटक रहे हैं, वहीं पेट्रोलियम कंपनियां मोबाइल पर 'भरपूर गैस उपलब्ध' होने के मैसेज भेज रही हैं। ग्राहकों का कहना है कि गैस बुकिंग नंबर सही से काम नहीं कर रहे हैं। सरकार द्वारा बुकिंग के बीच 25 दिन का अनिवार्य अंतराल किए जाने से घरेलू उपभोक्ता भी परेशान हैं, क्योंकि जरूरत पड़ने पर वे समय से पहले रिफिल नहीं ले पा रहे हैं।
गैस एजेंसियों पर इन दिनों केवाईसी (KYC) कराने के लिए उपभोक्ताओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। प्रशासन ने निर्बाध आपूर्ति के लिए केवाईसी अनिवार्य कर दिया है, जिसके चक्कर में लोग घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं। लोगों में असमंजस है कि शायद केवाईसी न होने की वजह से ही उन्हें गैस नहीं मिल रही है।
एटा के जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) कमलेश कुमार गुप्ता का कहना है कि जिले में गैस की उपलब्धता बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने जनता से धैर्य रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।