नोएडा: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध का असर अब दिल्ली-एनसीआर की रसोई तक पहुँच चुका है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में पिछले कुछ दिनों से गैस सिलेंडर की भारी किल्लत और एजेंसियों पर लग रही लंबी कतारों को देखते हुए गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी (DM) ने बुधवार को एक आपात बैठक बुलाई। बैठक में गैस एजेंसी संचालकों और पेट्रोलियम कंपनियों के अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी गई है कि उपभोक्ताओं को परेशान न किया जाए।
जिलाधिकारी ने बैठक के दौरान स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले में गैस की कालाबाजारी (Black Marketing) किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन को ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि कुछ एजेंसियां स्टॉक होने के बावजूद 'नो स्टॉक' का बोर्ड लगा रही हैं या ऊंचे दामों पर सिलेंडर बेच रही हैं।
डीएम ने निगरानी के लिए विशेष फ्लाइंग स्क्वायड (Special Teams) बनाई हैं जो जिले की विभिन्न गैस एजेंसियों पर अचानक छापेमारी करेंगी। यदि कोई भी एजेंसी या व्यक्ति तय कीमत से अधिक वसूली करते या स्टॉक छिपाते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ तत्काल प्रभाव से FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नोएडा के सेक्टरों और ग्रेटर नोएडा की सोसायटियों में सुबह से ही गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की भारी भीड़ देखी जा रही है। युद्ध के कारण सप्लाई बाधित होने की अफवाहों ने लोगों को डरा दिया है, जिससे वे जरूरत न होने पर भी सिलेंडर बुक करने की कोशिश कर रहे हैं। जिलाधिकारी ने जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें। जिले में घरेलू एलपीजी (Domestic LPG) का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करने के लिए पेट्रोलियम कंपनियों से लगातार बात की जा रही है।
प्रशासन ने सभी गैस एजेंसियों को आदेश दिया है कि वे कंज्यूमर हेल्पलाइन और कस्टमर कॉल्स को पूरी तरह से अटेंड करें। उपभोक्ताओं को सही जानकारी दी जाए कि उनके सिलेंडर की डिलीवरी कब तक होगी। अफरा-तफरी का माहौल न बने, इसके लिए पुलिस प्रशासन को भी गैस वितरण केंद्रों पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सिर्फ घरेलू स्तर पर ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक स्तर पर भी बदलाव दिखने लगे हैं। नोएडा से गुजरने वाली ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर खान-पान की सुविधा देने वाली संस्था IRCTC ने भी स्टेशन कैंटीनों को निर्देश दिया है कि वे अब गैस सिलेंडर के बजाय माइक्रोवेव और इंडक्शन कुकर का उपयोग शुरू करें ताकि गैस की खपत को कम किया जा सके।