इंदिरापुरम (गाजियाबाद)। कहते हैं कि मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है। इस कहावत को सच कर दिखाया है इंदिरापुरम की रहने वाली मानसी ने। जन्म से ही शारीरिक चुनौतियों का सामना करने वाली मानसी ने अपनी मेहनत और सकारात्मक सोच के दम पर न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि आज वह समाज के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन गई हैं।
मानसी के लिए बचपन से ही सामान्य बच्चों की तरह स्कूल जाना या खेलना आसान नहीं था। शारीरिक दिव्यांगता के कारण उन्हें कई बार सामाजिक भेदभाव और उपेक्षा का भी सामना करना पड़ा। लेकिन मानसी के माता-पिता उनके सबसे बड़े स्तंभ बने। उन्होंने मानसी को कभी महसूस नहीं होने दिया कि वह किसी से कम हैं।
मानसी ने अपनी पढ़ाई को कभी बाधित नहीं होने दिया। व्हीलचेयर पर रहते हुए उन्होंने न केवल उच्च शिक्षा प्राप्त की, बल्कि डिजिटल कौशल (Digital Skills) और तकनीक में भी महारत हासिल की। आज मानसी ऑनलाइन माध्यमों से न केवल खुद काम कर रही हैं, बल्कि अन्य दिव्यांग युवाओं को भी शिक्षित और सशक्त बनाने का काम कर रही हैं।
मानसी का मानना है कि समाज को दिव्यांगों को दया की दृष्टि से नहीं, बल्कि बराबरी की दृष्टि से देखना चाहिए। उनका कहना है:
"ईश्वर ने अगर एक रास्ता बंद किया है, तो सौ नए रास्ते भी खोले हैं। हमें बस अपनी छिपी हुई प्रतिभा को पहचानना है। मेरी व्हीलचेयर मेरी कमजोरी नहीं, मेरा रथ है जो मुझे मेरी मंजिलों तक ले जाता है।"
मानसी की इस हिम्मत और जज्बे को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और कई सामाजिक संस्थाओं ने उन्हें सम्मानित किया है। वह अब कई मोटिवेशनल कार्यक्रमों में मुख्य वक्ता के तौर पर भी आमंत्रित की जाती हैं।