मंगलवार, 17 मार्च 2026
गोंडा

गोंडा में 'मौत का एक्सप्रेसवे' बनीं सड़कें: 24 घंटे में दर्जनों लहूलुहान, रेलवे अफसर की मौत के बाद प्रशासन में हड़कंप

By Uttar World Desk

11 फ़र, 2026 | 08:05 बजे
गोंडा में 'मौत का एक्सप्रेसवे' बनीं सड़कें: 24 घंटे में दर्जनों लहूलुहान, रेलवे अफसर की मौत के बाद प्रशासन में हड़कंप

गोंडा। उत्तर प्रदेश का गोंडा जिला इन दिनों विकास की रफ्तार के साथ-साथ सड़क हादसों के एक खौफनाक दौर से गुजर रहा है। पिछले 24 घंटों के भीतर जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हुए आधा दर्जन से अधिक हादसों ने न केवल कई परिवारों को उम्र भर का दर्द दिया है, बल्कि जिले की यातायात व्यवस्था की कलई भी खोल दी है। इन हादसों में एक हाई-प्रोफाइल मामला रेलवे के मंडल वाणिज्य अधीक्षक (DCM) अरविंद कुमार की मौत का है, जिसने शासन से लेकर प्रशासन तक को हिलाकर रख दिया है।

ट्रैक्टर-ट्रॉली बनी काल: रेलवे अधिकारी की दर्दनाक मौत

 

हादसों की इस काली कड़ी में सबसे बड़ी खबर मोतीगंज थाना क्षेत्र से आई। गोंडा रेलवे स्टेशन पर तैनात मंडल वाणिज्य अधीक्षक अरविंद कुमार मंगलवार शाम को आधिकारिक कार्य निपटाकर मनकापुर से वापस गोंडा लौट रहे थे। जैसे ही वह अपनी स्कूटी से चीनी मिल के पास पहुंचे, एक अनियंत्रित ट्रैक्टर-ट्रॉली ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वह सड़क पर दूर जा गिरे और ट्रॉली का पहिया उन्हें रौंदते हुए निकल गया। आनन-फानन में उन्हें रेलवे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मूल रूप से बिहार के गया निवासी अरविंद कुमार की मौत की खबर मिलते ही रेलवे महकमे में शोक की लहर दौड़ गई।

वजीरगंज और नवाबगंज: रफ्तार का कहर जारी

हादसों का सिलसिला यहीं नहीं थमा। वजीरगंज थाना क्षेत्र में एक तेज रफ्तार कार और गन्ना लदी ट्रॉली के बीच भीषण भिड़ंत हो गई। इस हादसे में कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार की रफ्तार इतनी अधिक थी कि चालक नियंत्रण खो बैठा। वहीं, नवाबगंज में एक अनियंत्रित ट्रक ने बाइक सवार युवक को रौंद दिया, जिसे बेहद नाजुक हालत में लखनऊ ट्रामा सेंटर रेफर किया गया है।

ई-रिक्शा और लग्जरी कारों की भिड़ंत: कटरा बाजार का हाल

कटरा बाजार क्षेत्र के तिलका मोड़ के पास एक अजीबोगरीब हादसे में कार और ई-रिक्शा की टक्कर हो गई। बताया जा रहा है कि कार के भीतर अचानक मधुमक्खियां घुस आने के कारण चालक का संतुलन बिगड़ गया और कार ई-रिक्शा से टकराते हुए खाई में जा गिरी। इस हादसे में ई-रिक्शा सवार चार सवारियां और कार चालक अंकित समेत कई लोग घायल हुए। अस्पताल में इलाज के दौरान अंकित ने दम तोड़ दिया, जबकि अन्य का इलाज जारी है।

सफेद सफेद चादर (कोहरा) और ब्लैक स्पॉट्स: मौत की असली वजह?

गोंडा में बढ़ते सड़क हादसों के पीछे केवल मानवीय चूक नहीं, बल्कि बुनियादी ढाँचे की कमियां भी हैं। परिवहन विभाग ने जिले में 21 'ब्लैक स्पॉट्स' (अति संवेदनशील दुर्घटना क्षेत्र) चिन्हित किए हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन जगहों पर न तो पर्याप्त रिफ्लेक्टर लगाए गए हैं और न ही कोई चेतावनी बोर्ड। कोहरे के मौसम में ये ब्लैक स्पॉट्स काल बन जाते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल की तुलना में इस साल सड़क हादसों में 16% और मौतों में 13.79% की वृद्धि दर्ज की गई है।

अतिक्रमण और अवैध पार्किंग: सिकुड़ती सड़कें

गोंडा-बहराइच मार्ग, उतरौला रोड और बलरामपुर हाईवे पर सड़कों के किनारे मोरंग, गिट्टी और सरिया के अवैध ढेर लगे हुए हैं। दुकानदार अपनी दुकानें पटरियों तक फैला लेते हैं, जिसके कारण वाहन चालकों को सड़क पर जगह नहीं मिलती। इसके अलावा, भारी वाहनों की अवैध पार्किंग और क्षमता से अधिक सवारियां भरना (ओवरलोडिंग) भी बड़े हादसों का कारण बन रहा है। हाल ही में एक बोलेरो के नहर में पलटने से 11 लोगों की जान जाने के पीछे भी ओवरलोडिंग और तेज रफ्तार ही मुख्य वजह थी।

प्रशासन सख्त: आयुक्त ने दी कड़ी चेतावनी

बढ़ते हादसों को देखते हुए देवीपाटन मंडल के आयुक्त ने सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा है कि अगर '4E' (Education, Enforcement, Engineering, Emergency Care) नीति पर अमल नहीं हुआ, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। परिवहन विभाग अब स्कूलों में 'रोड सेफ्टी क्लब' बना रहा है ताकि बच्चों के जरिए अभिभावकों को जागरूक किया जा सके।

निष्कर्ष: गोंडा की सड़कें इस वक्त लहूलुहान हैं। जब तक सख्त प्रवर्तन और सार्वजनिक जागरूकता का मेल नहीं होगा, तब तक रफ्तार का यह तांडव थमने वाला नहीं है।

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