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गोंडा में WHO के नाम पर करोड़ों की ठगी, 51 बैंक खातों में खपाए गए ₹1.11 करोड़

By Uttar World Desk

03 अप्र, 2026 | 12:43 बजे
गोंडा में WHO के नाम पर करोड़ों की ठगी, 51 बैंक खातों में खपाए गए ₹1.11 करोड़

गोंडा | उत्तरवर्ल्ड न्यूज डेस्क | उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से एक सनसनीखेज धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और स्वास्थ्य विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से करोड़ों रुपये की ठगी की गई है। इस गिरोह का जाल इतना गहरा था कि पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अब तक 51 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है, जिनमें 1.11 करोड़ रुपये की राशि मौजूद है।

नौकरी का झांसा और करोड़ों का खेल

खबरों के अनुसार, यह पूरा मामला एक सुनियोजित 'जॉब स्कैम' (Job Scam) है। ठगों ने खुद को स्वास्थ्य विभाग और WHO का अधिकारी बताकर भोले-भाले युवाओं को निशाना बनाया। उन्हें डेटा ऑपरेटर, फील्ड वर्कर और अन्य पदों पर सीधी भर्ती का लालच दिया गया। युवाओं का विश्वास जीतने के लिए फर्जी नियुक्ति पत्र (Appointment Letters) और फर्जी ट्रेनिंग सेंटर तक का इस्तेमाल किया गया।

जांच में यह बात सामने आई है कि ठगों ने न केवल गोंडा, बल्कि आसपास के जिलों के युवाओं से भी मोटी रकम वसूली। किसी से 2 लाख तो किसी से 5 लाख रुपये तक लिए गए। जब महीनों बीत जाने के बाद भी युवाओं की जॉइनिंग नहीं हुई, तब जाकर इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।



पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 51 खाते और 1.11 करोड़ फ्रीज

गोंडा पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त जांच में इस घोटाले की परतें दर परत खुलती जा रही हैं। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और बैंक ट्रांजैक्शन की मदद से उन खातों का पता लगाया, जिनमें ठगी की रकम ट्रांसफर की गई थी।

  • कुल फ्रीज खाते: 51

  • होल्ड की गई राशि: ₹1,11,00,000 (1.11 करोड़)

  • कार्यवाही का दायरा: पुलिस अब इन खातों के स्वामियों और उनके गिरोह से संबंधों की तलाश कर रही है।

पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने पाया कि ये खाते अलग-अलग बैंकों में फर्जी दस्तावेजों या 'म्यूल अकाउंट्स' (दूसरों के नाम पर किराए के खाते) के जरिए संचालित किए जा रहे थे।

WHO और स्वास्थ्य विभाग की छवि का इस्तेमाल

इस घोटाले की सबसे गंभीर बात यह है कि ठगों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्था के नाम का दुरुपयोग किया। ग्रामीण क्षेत्रों में WHO की प्रतिष्ठा बहुत अधिक है, जिसका फायदा उठाकर ठगों ने लोगों को यकीन दिलाया कि यह एक सरकारी और अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट है।



स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि विभाग या WHO कभी भी इस तरह से पैसों के बदले नौकरी का प्रस्ताव नहीं देता। यह पूरी तरह से एक संगठित अपराध था जिसे शातिर दिमाग अपराधियों ने अंजाम दिया।

कैसे जाल बिछाता था यह गिरोह?

जांच में शामिल अधिकारियों के मुताबिक, गिरोह के काम करने का तरीका (Modus Operandi) बेहद पेशेवर था:

  1. सोशल मीडिया और पंपलेट्स: व्हाट्सएप ग्रुप्स और स्थानीय विज्ञापनों के जरिए नौकरियों का प्रचार किया जाता था।

  2. फर्जी इंटरव्यू: कई मामलों में किराए के दफ्तरों में बाकायदा 'इंटरव्यू' आयोजित किए जाते थे ताकि सब कुछ असली लगे।

  3. ट्रेनिंग के नाम पर वसूली: जॉइनिंग से पहले 'सिक्योरिटी डिपॉजिट' और 'ट्रेनिंग फीस' के नाम पर किस्तों में पैसे लिए जाते थे।

  4. डिजिटल ट्रांजैक्शन: पुलिस को चकमा देने के लिए पैसे सीधे नकद लेने के बजाय अलग-अलग बैंक खातों में मंगाए जाते थे।

पीड़ितों की दास्तां: सपनों के साथ खिलवाड़

गोंडा के रहने वाले एक पीड़ित युवक ने बताया, "मुझसे स्वास्थ्य विभाग में बाबू की नौकरी दिलाने के नाम पर 3.50 लाख रुपये लिए गए। मुझे बाकायदा एक लेटर हेड पर नियुक्ति पत्र भी दिया गया। जब मैं ऑफिस जॉइन करने पहुंचा, तब पता चला कि वह विभाग में ऐसा कोई पद ही नहीं है और लेटर फर्जी है।"

ऐसे सैकड़ों युवा हैं जिन्होंने अपनी जमीन बेचकर या कर्ज लेकर ठगों को पैसे दिए थे। अब पुलिस की इस कार्रवाई से उन युवाओं में थोड़ी उम्मीद जगी है कि शायद उनका पैसा वापस मिल सके।

पुलिस और प्रशासन की अपील

गोंडा पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी लुभावने विज्ञापन या नौकरी के झांसे में न आएं। पुलिस ने साफ किया है कि:

  • सरकारी या प्रतिष्ठित संस्थाओं में भर्ती की प्रक्रिया आधिकारिक वेबसाइटों के जरिए ही होती है।

  • कोई भी सरकारी विभाग नौकरी के बदले नकद या निजी खातों में पैसे की मांग नहीं करता।

  • यदि किसी के साथ इस तरह की धोखाधड़ी हुई है, तो वे तुरंत स्थानीय थाने या साइबर सेल में अपनी शिकायत दर्ज कराएं।

निष्कर्ष: सिस्टम के लिए बड़ी चुनौती

गोंडा का यह ₹1.11 करोड़ का स्कैम केवल एक जिले की कहानी नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि डिजिटल युग में ठग कितने सक्रिय हो गए हैं। 51 खातों को फ्रीज करना पुलिस की बड़ी सफलता है, लेकिन इस गिरोह के मास्टरमाइंड को सलाखों के पीछे पहुंचाना अभी भी एक चुनौती बना हुआ है। 'उत्तरवर्ल्ड न्यूज' इस मामले की हर अपडेट आप तक पहुँचाता रहेगा।

ब्यूरो रिपोर्ट, उत्तरवर्ल्ड न्यूज

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