गोंडा: जनपद में लोक निर्माण विभाग (PWD) के निर्माण खंड-एक की कार्यशैली एक बार फिर विवादों के घेरे में है। भ्रष्टाचार का आलम यह है कि जिस सड़क के लिए ग्रामीणों ने 11 वर्षों तक लंबा इंतज़ार किया, वह सड़क बनने के मात्र 3 दिन के भीतर ही उखड़ने लगी है। 29 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से बनी यह 1.6 किमी लंबी सड़क अब विभाग की पोल खोल रही है।
3 दिन में ही 'बदहाल' हुई सड़क, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
विकास के दावों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाई गई हैं। 11 साल बाद जब सड़क पर डामर पड़ा, तो लोगों को लगा कि अब राह आसान होगी, लेकिन घटिया निर्माण सामग्री के कारण महज 72 घंटों में ही गिट्टियां बाहर आने लगीं। इससे क्षेत्र के लोगों में विभाग के खिलाफ भारी नाराजगी देखी जा रही है।
अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास
इस गंभीर लापरवाही पर जब विभागीय अधिकारियों से जवाब मांगा गया, तो उनके सुर अलग-अलग नजर आए। अधिशासी अभियंता सुरेश राम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि जांच के लिए मौके पर टीम रवाना कर दी गई है। वहीं दूसरी ओर, जेई अश्वनी सिन्हा ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से साफ इनकार किया है, जिससे विभाग की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
गुणवत्ता पर पहले भी लग चुके हैं दाग
बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब गोंडा PWD की सड़कों पर सवाल उठे हों। इससे पहले निर्माण खंड-दो के अंतर्गत आने वाले लहदोवा-कमड़ावा मार्ग का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था, जिसके बाद विभाग को दोबारा डामरीकरण कराने पर मजबूर होना पड़ा था।
फोरलेन निर्माण की भी तैयारी
विवादों के बीच एक राहत भरी खबर यह भी है कि कचहरी रेलवे स्टेशन से मंडलीय कारागार और मेडिकल कॉलेज बादशाह बाग चौराहे तक फोरलेन बनाने के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अधीक्षण अभियंता योगेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि दोनों ओर सात-सात मीटर चौड़ी सड़क बनाई जाएगी, जिसमें डिवाइडर और फुटपाथ की सुविधा भी मिलेगी।