गोरखपुर : भारतीय रेल के आधुनिकीकरण और ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने की दिशा में पूर्वोत्तर रेलवे (NER) ने एक और मील का पत्थर पार कर लिया है। महाप्रबंधक श्री उदय बोरवणकर के कुशल मार्गदर्शन में रेलवे ने अब तक कुल 138.57 रूट किलोमीटर क्षेत्र में ऑटोमेटिक ब्लॉक सिगनलिंग (ABS) प्रणाली को सफलतापूर्वक चालू कर दिया है।
हाल ही में लखनऊ मंडल के गोरखपुर-गोंडा रेल खंड पर स्थित बभनान-परसा तिवारी-स्वामी नारायण छपिया स्टेशनों के बीच 12 किमी लंबे खंड पर इस अत्याधुनिक प्रणाली की कमीशनिंग पूरी की गई।
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि बभनान और स्वामी नारायण छपिया के बीच का कार्य बेहद सुगम तरीके से संपन्न किया गया। तकनीकी टीम ने सुनिश्चित किया कि इस दौरान ट्रेनों का परिचालन रत्ती भर भी प्रभावित न हो।
वित्त वर्ष 2025-26 पूर्वोत्तर रेलवे के लिए विशेष उपलब्धियों भरा रहा है। इस वर्ष अब तक:
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गोविन्दनगर-टिनिच-गौर-बभनान (24.64 किमी)
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बभनान-स्वामी नारायण छपिया (12 किमी) सहित कुल 36.64 किमी रेल खंड को ऑटोमेटिक सिगनलिंग से लैस किया जा चुका है।
ABS प्रणाली के बड़े फायदे: रफ्तार और संरक्षा
मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी (CPRO) पंकज कुमार सिंह के अनुसार, बभनान-स्वामी नारायण छपिया खंड पर कार्य पूर्ण होने से रेल परिचालन में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे:
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लाइन क्षमता में वृद्धि: एक ही दिशा में अब एक के पीछे दूसरी ट्रेन कम अंतराल पर भेजी जा सकेगी, जिससे अधिक ट्रेनों का संचलन संभव होगा।
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समय-पालन (Punctuality): ट्रेनों के रुकने की संभावना कम होगी, जिससे यात्री गंतव्य तक समय पर पहुँच सकेंगे।
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उच्च स्तरीय संरक्षा: मानवीय भूलों की गुंजाइश कम होगी और तकनीकी रूप से ट्रेनें अधिक सुरक्षित रहेंगी।
जगतबेला-मगहर से हुई थी इस क्रांति की शुरुआत
पूर्वोत्तर रेलवे पर ऑटोमेटिक ब्लॉक सिगनलिंग के सफर की शुरुआत पिछले वित्त वर्ष (2024-25) में जगतबेला-मगहर (14.65 किमी) खंड से हुई थी। तब से लेकर अब तक रेलवे ने अपनी गति को निरंतर बनाए रखा है।
प्रमुख मुख्य सिगनल एवं दूरसंचार इंजीनियर श्री एम.एल. मकवाना और उनकी तकनीकी टीम के नेतृत्व में इस चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। रेलवे का लक्ष्य है कि आने वाले समय में अन्य व्यस्त रेल खंडों को भी इसी प्रणाली से जोड़ा जाए ताकि यात्रियों को सुगम और तेज यात्रा का अनुभव मिल सके।
क्या होती है ऑटोमेटिक ब्लॉक सिगनलिंग (ABS)?
साधारण शब्दों में, वर्तमान प्रणाली में दो स्टेशनों के बीच एक समय में एक ही ट्रेन रह सकती है। लेकिन ABS प्रणाली लागू होने के बाद, दो स्टेशनों के बीच के ट्रैक को छोटे-छोटे हिस्सों (सिगनल ब्लॉक्स) में बांट दिया जाता है। इससे एक ही दिशा में एक के पीछे एक कई ट्रेनें सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए चल सकती हैं, जिससे ट्रैक की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।