गोरखपुर जिले की एक जांबाज बेटी ने वह कर दिखाया है जिसकी कल्पना करना भी रोंगटे खड़े कर देता है। गोरखपुर की दिव्या सिंह ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी, माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप (17,598 फीट) तक साइकिल से पहुँचकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। हड्डियों को जमा देने वाली ठंड, ऑक्सीजन की कमी और ऊबड़-खाबड़ रास्तों को मात देते हुए दिव्या ने तिरंगा फहराया और पूरे प्रदेश सहित गोरखपुर का मान सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है।
साहस और जुनून का सफर (The Challenging Journey): एवरेस्ट बेस कैंप तक की चढ़ाई पैदल करना भी अपने आप में एक बड़ी चुनौती मानी जाती है, लेकिन दिव्या ने इसे अपनी साइकिल से फहराने का संकल्प लिया। नेपाल के ऊंचे पहाड़ों, बर्फीली हवाओं और पतले रास्तों पर साइकिल चलाना जान जोखिम में डालने जैसा था। दिव्या ने बताया कि इस सफर के दौरान कई बार ऐसे मौके आए जब शरीर ने जवाब दे दिया था, लेकिन उनके मन में छिपे 'गोरखपुरिया जज्बे' ने उन्हें रुकने नहीं दिया। ऑक्सीजन के घटते स्तर और शून्य से कई डिग्री नीचे के तापमान में भी उन्होंने अपनी पैडल मारना जारी रखा।
गोरखपुर में जश्न और गर्व (Pride of Gorakhpur): दिव्या सिंह की इस ऐतिहासिक सफलता की खबर जैसे ही गोरखपुर पहुँची, शहर में खुशी की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें 'माउंटेन गर्ल' और 'साइकिलिंग क्वीन' जैसे नामों से पुकार रहे हैं। उनके परिवार और दोस्तों का कहना है कि दिव्या शुरू से ही साहसिक खेलों (Adventure Sports) में रुचि रखती थीं, लेकिन एवरेस्ट बेस कैंप तक साइकिल से पहुँचना उनकी सबसे बड़ी और अविस्मरणीय उपलब्धि है।
महिलाओं के लिए नई मिसाल (Inspiration for Women): दिव्या की यह जीत उन सभी लड़कियों के लिए एक कड़ा जवाब है जो अपने सपनों को छोटा समझती हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर इरादे फौलादी हों, तो पहाड़ की ऊंचाई भी छोटी पड़ जाती है। दिव्या अब उन हज़ारों युवाओं के लिए रोल मॉडल बन गई हैं जो लीक से हटकर कुछ करना चाहते हैं। uttarworld.com दिव्या सिंह के इस अदम्य साहस को सलाम करता है और उनकी इस विश्व रिकॉर्ड वाली उपलब्धि पर उन्हें बधाई देता है।