बर्लिन/बीजिंग: अक्सर चीनी एनिमेशन फिल्मों का नाम आते ही हमारे दिमाग में पौराणिक कथाएं या जादुई दुनिया घूमने लगती है। लेकिन युवा निर्देशक क्सू जाओ (Xu Zao) की पहली एनिमेटेड फिल्म 'लाइट पिलर' (Light Pillar) इससे बिल्कुल अलग है। बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (Berlinale 2026) में दिखाई गई यह फिल्म आज के दौर के अकेलेपन और डिजिटल दुनिया के मोहजाल को बड़ी खूबसूरती से पर्दे पर उतारती है।
फिल्म का मुख्य किरदार 'लाओ झा' (Lao Zha) एक पुराने और दिवालिया हो रहे फिल्म स्टूडियो का कर्मचारी है। स्टूडियो के पास उसे वेतन देने के पैसे नहीं हैं, इसलिए मालिक उसे सैलरी के बदले एक VR (Virtual Reality) हेडसेट दे देता है। झा जैसे ही इस वर्चुअल दुनिया में कदम रखता है, वह वहां की रंगीनियत और एक फीमेल प्लेयर के प्यार में खो जाता है। फिल्म दिखाती है कि कैसे झा अपनी असली गरीबी और अकेलेपन से बचने के लिए उस कृत्रिम (Artificial) दुनिया को ही सच मान बैठता है।
फिल्म की असली दुनिया को हाथ से बने एनिमेशन (Hand-drawn visuals) में दिखाया गया है, जबकि वर्चुअल दुनिया को लाइव-एक्शन वीडियो के ज़रिए पेश किया गया है। यह प्रयोग दर्शकों को चौंकाता है। फिल्म दिखाती है कि तकनीक कैसे इंसानी रिश्तों और यादों को मिटा रही है। फिल्म में एक बिल्ली का किरदार भी है, जो पुरानी यादों का प्रतीक है। फिल्म उदास तो है, लेकिन इसमें उम्मीद की किरण भी है। यह हमें याद दिलाती है कि असली दुनिया की छोटी-छोटी खुशियां भी किसी डिजिटल जन्नत से बड़ी हैं।
क्सू जाओ इससे पहले अपनी शॉर्ट फिल्म के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार जीत चुके हैं। 'लाइट पिलर' को मैच्योर एनिमेशन (वयस्क दर्शकों के लिए) की श्रेणी में एक मास्टरपीस माना जा रहा है।