Niigata, Japan: 2011 की फुकुशिमा त्रासदी (Fukushima disaster) के 15 साल बाद, जब जापान ने दुनिया के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र—Kashiwazaki-Kariwa—को फिर से चालू करने की कोशिश की, तो एक तकनीकी खराबी ने इस मिशन पर ब्रेक लगा दिया। बुधवार को रिएक्टर नंबर 6 को एक्टिवेट किया गया था, लेकिन कुछ ही घंटों बाद एक बड़े मालफंक्शन (Malfunction) के कारण पूरी प्रक्रिया को सस्पेंड करना पड़ा।
क्या हुई गड़बड़ी? (The Glitch)
संयंत्र के ऑपरेटर TEPCO (Tokyo Electric Power Company) के अनुसार, समस्या Control Rods (कंट्रोल रॉड्स) से जुड़ी थी। रिएक्टर को चालू करने के लिए कोर (Core) से न्यूट्रॉन सोखने वाली इन रॉड्स को धीरे-धीरे बाहर निकाला जा रहा था ताकि 'Nuclear Fission' (परमाणु विखंडन) की प्रक्रिया शुरू हो सके।
लेकिन, इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट में खराबी के कारण इस प्रक्रिया को बीच में ही रोकना पड़ा। TEPCO ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल रिएक्टर "स्टेबल" (Stable) है और किसी भी तरह के रेडियोधर्मी रिसाव (Radioactive impact) का खतरा नहीं है।
Control Rods का काम क्या है?
एक न्यूक्लियर रिएक्टर में कंट्रोल रॉड्स ब्रेक की तरह काम करती हैं।
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Withdrawal (बाहर निकालना): इससे चैन रिएक्शन तेज होता है और बिजली पैदा होती है।
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Insertion (अंदर डालना): इससे रिएक्शन धीमा हो जाता है या पूरी तरह बंद हो जाता है। चूंकि ये रॉड्स रिएक्टर की सुरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं, इसलिए इनमें छोटी सी गड़बड़ी भी जापानी अधिकारियों के लिए चिंता का विषय बन गई है।
फुकुशिमा की कड़वी यादें और TEPCO का ट्रैक रिकॉर्ड
Kashiwazaki-Kariwa प्लांट उत्तर-मध्य जापान में स्थित है और इसमें कुल 7 रिएक्टर हैं। यह दुनिया का सबसे शक्तिशाली परमाणु संयंत्र है। 2011 में आए भीषण भूकंप और सुनामी के बाद, जब फुकुशिमा दाइची (Fukushima Daiichi) प्लांट में मेल्टडाउन हुआ था, तब जापान ने अपने सभी परमाणु संयंत्र बंद कर दिए थे।
हैरानी की बात यह है कि Kashiwazaki-Kariwa को भी वही TEPCO कंपनी चलाती है, जो फुकुशिमा की विफलता के लिए जिम्मेदार मानी गई थी। यही कारण है कि स्थानीय निवासी और सुरक्षा विशेषज्ञ इस रिस्टार्ट का कड़ा विरोध कर रहे हैं।
क्यों जरूरी है यह प्लांट जापान के लिए?
जापान जैसे संसाधन-विहीन देश के लिए परमाणु ऊर्जा को फिर से शुरू करना मजबूरी बनता जा रहा है:
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Fossil Fuels पर निर्भरता कम करना: जापान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए तेल और गैस के आयात पर भारी खर्च करता है।
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Carbon Neutrality 2050: जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए परमाणु ऊर्जा को 'क्लीन एनर्जी' माना जा रहा है।
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Artificial Intelligence की मांग: AI और डेटा सेंटर्स की बढ़ती जरूरतों के लिए जापान को भारी मात्रा में बिजली चाहिए।
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विशाल क्षमता: अकेले रिएक्टर नंबर 6 से 1.35 मिलियन किलोवाट बिजली पैदा हो सकती है, जो टोक्यो के 10 लाख घरों को रोशन करने के लिए काफी है।
विरोध की लहर: 60% जनता खिलाफ
एक हालिया सर्वे के अनुसार, नीगाटा (Niigata) क्षेत्र के 60% निवासी इस प्लांट को चालू करने के विरोध में हैं। विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि यह प्लांट एक सक्रिय सिस्मिक फॉल्ट ज़ोन (Seismic fault zone) पर स्थित है, यानी यहाँ भूकंप आने का खतरा हमेशा बना रहता है। करीब 40,000 लोगों ने इस रिस्टार्ट के खिलाफ याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं।
UP Halchal Analysis: जापान के लिए यह "प्रतिष्ठा का सवाल" (Matter of prestige) भी है। अगर TEPCO दुनिया के सबसे बड़े प्लांट को सुरक्षित तरीके से नहीं चला पाता है, तो जापान के परमाणु भविष्य पर फिर से काले बादल मंडराने लगेंगे।