Davos, Switzerland : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया को अपनी 'डील-मेकिंग' पावर से चौंका दिया है। स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित World Economic Forum (WEF) में ट्रंप ने औपचारिक रूप से अपने 'Board of Peace' (शांति बोर्ड) के पहले चार्टर का ऐलान कर दिया है।
यह कोई साधारण संगठन नहीं है, बल्कि ट्रंप इसे दुनिया का "सबसे प्रतिष्ठित बोर्ड" (Most Prestigious Board) बता रहे हैं। खास बात यह है कि इस बोर्ड की परमानेंट मेंबरशिप की कीमत $1 बिलियन (करीब 8300 करोड़ रुपये) रखी गई है। शुरुआत में इसे केवल गाजा के पुनर्निर्माण (Gaza Reconstruction) के लिए बनाया गया था, लेकिन अब इसका दायरा पूरी दुनिया के संघर्षों को सुलझाने तक फैल गया है।
पाकिस्तान समेत कई दिग्गज देश हुए शामिल
इस बोर्ड की लॉन्चिंग के वक्त ट्रंप के साथ मंच पर दुनिया के कई ताकतवर नेता मौजूद थे। ट्रंप ने दावा किया कि "हर कोई" इस बोर्ड का हिस्सा बनना चाहता है। शामिल होने वाले देशों की लिस्ट लंबी है:
- Pakistan: प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) इस बोर्ड के सदस्य के रूप में शामिल हुए हैं।
- Argentina: राष्ट्रपति जेवियर माइली (Javier Milei)।
- Indonesia: राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो (Prabowo Subianto)।
- Saudi Arabia, Turkey & UAE: इनके समेत कुल 8 इस्लामिक देशों ने इस बोर्ड के साथ जुड़ने पर सहमति जताई है।
- Central Asia: उज्बेकिस्तान, आर्मेनिया और अजरबैजान के प्रमुख भी इस मिशन का हिस्सा बने हैं।
"Gaza is coming to an end": ट्रंप की दोटूक चेतावनी
ट्रंप ने मंच से घोषणा की कि गाजा की जंग अब "वास्तव में खत्म होने वाली है" (Really coming to an end), बस कुछ 'छोटी आग' (little fires) बुझाना बाकी है। उन्होंने हमास को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, "हमास को अपने हथियार छोड़ने होंगे, वरना यह उनका अंत होगा। वे लोग हाथों में राइफल लेकर पैदा हुए थे, लेकिन अब शांति का वक्त है।"
ट्रंप ने यह भी साफ किया कि बोर्ड का पहला फोकस गाजा होगा, लेकिन सफलता मिलते ही वे रूस-यूक्रेन जैसी अन्य बड़ी जंगों को भी सुलझाएंगे। उन्होंने अपने पुराने दावे को दोहराते हुए कहा कि वह पहले ही 8 युद्ध रुकवा चुके हैं और "अगला युद्ध भी जल्द ही खत्म होने वाला है।"
United Nations और 'Board of Peace' का रिश्ता
दुनिया भर में चर्चा थी कि क्या ट्रंप का यह नया बोर्ड United Nations (UN) की जगह लेगा? इस पर ट्रंप ने डिप्लोमैटिक रुख अपनाते हुए कहा कि वे UN के साथ मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा, "Board of Peace और UN का कॉम्बिनेशन दुनिया के लिए कुछ बहुत ही अनोखा (Unique) साबित हो सकता है।" हालांकि, जानकारों का मानना है कि $1 बिलियन की मेंबरशिप फीस और ट्रंप की सीधी लीडरशिप इसे UN से भी ज्यादा पावरफुल 'Pay-to-Play' क्लब बना सकती है।
भारत का क्या है स्टैंड? (India's Position)
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत इस बोर्ड का हिस्सा बनेगा? रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी ट्रंप ने इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता दिया है। हालांकि, भारत ने अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय और रणनीतिक विशेषज्ञ इस बोर्ड की 'वैधता' और 'मैंडेट' को बारीकी से देख रहे हैं। भारत के लिए $1 बिलियन की फीस और पाकिस्तान की मौजूदगी जैसे फैक्टर्स काफी अहम होंगे।