मंगलवार, 17 मार्च 2026
अंतर्राष्ट्रीय

अफ्रीकी संघ शिखर सम्मेलन: ट्रंप की नीतियों का साया, विदेशी सहायता में कटौती और व्यापारिक बाधाओं पर मंथन

By Uttar World Desk

13 फ़र, 2026 | 12:31 बजे
अफ्रीकी संघ शिखर सम्मेलन: ट्रंप की नीतियों का साया, विदेशी सहायता में कटौती और व्यापारिक बाधाओं पर मंथन

अदीस अबाबा (इथियोपिया): अफ्रीकी संघ (African Union) का 39वां वार्षिक शिखर सम्मेलन शुक्रवार से शुरू हो गया है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस सम्मेलन में हिस्सा नहीं ले रहे हैं, लेकिन उनकी 'अमेरिका फर्स्ट' नीतियों का प्रभाव इस बैठक में साफ देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप की नीतियां इस समय अफ्रीकी नेताओं के लिए चर्चा का सबसे बड़ा और पेचीदा विषय बनी हुई हैं।

विदेशी सहायता में भारी कटौती से बढ़ा संकट ट्रंप प्रशासन द्वारा विदेशी सहायता (Foreign Aid) में की गई ऐतिहासिक कटौती ने अफ्रीका के कई देशों को मुश्किल में डाल दिया है। विशेष रूप से स्वास्थ्य क्षेत्र में USAID को खत्म करने और PEPFAR (HIV के खिलाफ अमेरिकी कार्यक्रम) के फंड को फ्रीज करने से लाखों लोगों की जान पर खतरा मंडराने लगा है। एक अनुमान के अनुसार, सहायता में इस कटौती से सालाना 5 से 10 लाख लोगों की मौत हो सकती है, जो कुपोषण, मलेरिया और अन्य बीमारियों से जूझ रहे हैं।

व्यापार और शुल्क (Tariffs) की मार अमेरिकी व्यापार नीति में हुए बदलावों ने अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाओं को भी प्रभावित किया है। हाल ही में लेसोथो और मेडागास्कर जैसे देशों पर लगाए गए भारी आयात शुल्क ने वहां के स्थानीय उद्योगों के लिए संकट खड़ा कर दिया है। हालांकि, कुछ राहत देते हुए ट्रंप प्रशासन ने 'अफ्रीकी विकास और अवसर अधिनियम' (AGOA) को 2026 तक के लिए बढ़ा दिया है, लेकिन यह केवल एक अस्थायी समाधान माना जा रहा है।

वीजा निलंबन और कूटनीतिक तनाव डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने 75 देशों (जिनमें 26 अफ्रीकी देश शामिल हैं) के आव्रजन वीजा की प्रोसेसिंग रोक दी है। इसके जवाब में तीन अफ्रीकी देशों ने भी अमेरिकी नागरिकों की यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया है। अफ्रीकी संघ के नेता अब इस 'लेन-देन' (Transactional) वाली राजनीति और द्विपक्षीय समझौतों के बीच एक नया संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

नया संतुलन बनाने की कोशिश सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि अफ्रीका को अब किसी एक महाशक्ति (अमेरिका, चीन या रूस) पर निर्भर रहने के बजाय अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' पर काम करना होगा। दक्षिण अफ्रीका और नाइजीरिया जैसे बड़े देश जहां एक ओर अमेरिका के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर चीन के साथ अपने व्यापारिक रिश्तों को भी मजबूत कर रहे हैं।

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