बीजिंग : चीन इस समय वैश्विक राजनीति में न केवल व्यापार और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभा रहा है, बल्कि मुस्लिम देशों के साथ अपने राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को भी और मजबूत कर रहा है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने हाल ही में 57 सदस्यीय इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के महासचिव हुसैन इब्राहिम ताहा से बातचीत की, जिसमें दोनों पक्षों ने सहयोग और आपसी विश्वास को और गहरा करने पर सहमति जताई।
चीन के विदेश मंत्री ने मुलाकात के दौरान कहा कि चीन हमेशा OIC और मुस्लिम देशों के साथ रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संबंधों को बनाए रखने में विश्वास रखता है और वह इन देशों की वैध हितों और विकासशील राष्ट्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम करने को तैयार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बीजिंग का मानना है कि दुनिया को “जंगल का कानून” — यानी कमजोर देशों पर बड़ी ताकतों द्वारा दबाव बनाने — की ओर नहीं लौटना चाहिए और यह साझेदारी इसी दिशा में एक कदम है।
इस संपर्क की अहमियत इस समय बढ़ गई है क्योंकि अमेरिका और उसके व्यापार साझेदारों के बीच टैरिफ विवाद तेज़ हैं, और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को कई देशों ने “आर्थिक दबाव” के रूप में देखा है। चीन ने ऐसे माहौल में मुस्लिम दुनिया के साथ अपने रिश्तों को बढ़ाने को भौगोलिक और राजनीतिक संतुलन का जरिया बताया है और OIC को “मुस्लिम देशों के हितों की आवाज़” कहा है।
विश्लेषकों के अनुसार, चीन की यह पहल मुस्लिम देशों के साथ भू-राजनीतिक वाणिज्यिक, सुरक्षा और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देती दिख रही है और यह स्पष्ट संकेत देती है कि चीन पश्चिमी दबावों के बीच विश्वसीय राजनयिक नेटवर्क का विस्तार कर रहा है। OIC के साथ मजबूत संबंध न केवल मध्य पूर्व और अफ़्रीका में चीन के प्रभाव को बढ़ाते हैं, बल्कि व्यापार और कूटनीति में भी उसे नए लाभ दे सकते हैं।
इस बीच OIC के महासचिव और कई मुस्लिम देशों के प्रतिनिधियों ने भी सकारात्मक टिप्पणियाँ की हैं कि चीन के साथ सहयोग ने इस्लामिक दुनिया और विकासशील राष्ट्रों के बीच विश्वास और सम्मान को बढ़ाया है। भविष्य में यह रिश्तों का विस्तार तकनीकी, व्यापारिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में और आगे होने की संभावना जताई जा रही है।