न्यूज़ डेस्क: ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के पांचवें दिन एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया के कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA ईरान के भीतर विद्रोह शुरू कराने के लिए विपक्षी कुर्द बलों (Kurdish Forces) को हथियारबंद करने की योजना बना रही है। UttarWorld News की इस विशेष रिपोर्ट में जानिए क्या है ट्रंप प्रशासन का ये 'मास्टर प्लान'।
1. कुर्द लड़ाकों के जरिए ईरान को घेरने की तैयारी
खबरों के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन ईरान के कुर्द विपक्षी समूहों के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रहा है। सीएनएन (CNN) की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका का उद्देश्य इन कुर्द लड़ाकों को आधुनिक हथियार देकर उन्हें ईरान के खिलाफ खड़ा करना है। इससे ईरानी सेना को उत्तरी और पश्चिमी मोर्चों पर उलझाया जा सकेगा, जिससे इजरायल के लिए एक 'बफर जोन' (Buffer Zone) तैयार होगा।
2. ट्रंप और कुर्द नेताओं के बीच 'गुप्त' बातचीत?
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरानी कुर्दिस्तान की डेमोक्रेटिक पार्टी (KDPI) के प्रमुख मुस्तफा हिजरी और इराक के प्रमुख कुर्द नेताओं से बातचीत की है। इराक के कुर्द नेता बाफेल तालाबानी ने ट्रंप के साथ बातचीत की पुष्टि भी की है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में ये कुर्द समूह ईरान के पश्चिमी प्रांतों में जमीनी अभियानों (Ground Operations) में भाग ले सकते हैं।
3. विशेषज्ञों की चेतावनी: "आग से खेल रहा है अमेरिका"
विशेषज्ञों ने इस कदम को 'बेहद खतरनाक' बताया है। चथम हाउस के विश्लेषकों का मानना है कि कुर्द समूहों को हथियार देने से ईरान में गृहयुद्ध छिड़ सकता है, जिससे पूरा क्षेत्र अस्थिर हो जाएगा। यह कदम तुर्किये और सीरिया जैसे देशों को भी नाराज कर सकता है, क्योंकि उनके यहां भी कुर्द अलगाववाद एक बड़ी समस्या है। विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप का यह 'DIY' (खुद करो) तरीका ईरान में भारी तबाही ला सकता है।
4. CIA का पुराना इतिहास: विद्रोह भड़काना और हथियार बांटना
यह पहली बार नहीं है जब CIA किसी देश की सरकार को अस्थिर करने के लिए विद्रोही समूहों का सहारा ले रही है। इतिहास गवाह है कि अफगानिस्तान (1970 के दशक), निकारागुआ (1980 के दशक), और वियतनाम में भी अमेरिका ने इसी तरह की रणनीति अपनाई थी। ईरान में भी 1953 में अमेरिका और ब्रिटेन ने मिलकर लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार का तख्तापलट किया था।