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कोलंबिया के मुस्लिम समुदाय ने शुरू किया रमजान का जश्न, जानें दक्षिण अमेरिका में कैसे इस्लाम ने बनाई अपनी जगह

By Uttar World Desk

24 फ़र, 2026 | 06:23 बजे
कोलंबिया के मुस्लिम समुदाय ने शुरू किया रमजान का जश्न, जानें दक्षिण अमेरिका में कैसे इस्लाम ने बनाई अपनी जगह

बोगोटा (कोलंबिया): जब हम दक्षिण अमेरिका के बारे में सोचते हैं, तो अक्सर हमारे दिमाग में फुटबॉल, कॉफी और वहां की लैटिन संस्कृति आती है। लेकिन इस बार कोलंबिया से एक बेहद खूबसूरत तस्वीर सामने आ रही है। दुनिया भर के साथ-साथ कोलंबia के छोटे लेकिन बेहद सक्रिय मुस्लिम समुदाय ने पवित्र महीने रमजान (Ramadan 2026) का जश्न मनाना शुरू कर दिया है।

कोलंबिया में इस्लाम का इतिहास

कोलंबिया में इस्लाम की मौजूदगी कोई नई बात नहीं है। सदियों पहले अरब देशों से आए प्रवासियों ने यहां अपनी जगह बनाई थी। आज, बोगोटा, माइकाओ और बुएनावेंटुरा जैसे शहरों में मुस्लिम समुदाय की जड़ें काफी गहरी हैं। हालांकि संख्या के मामले में यह समुदाय छोटा है, लेकिन अपनी संस्कृति और एकता के मामले में यह "मजबूत और प्रभावशाली" माना जाता है।

कैसे मनाया जाता है यहाँ रमजान?

कोलंबिया के मुस्लिम समुदाय के लिए रमजान सिर्फ रोज़ा रखना या तेलावत करना नहीं है, बल्कि अपनी पहचान को मजबूत करने का एक जरिया है।

इफ्तार का संगम: बोगोटा की 'अबू बकर अल-सिद्दीक' मस्जिद में शाम को इफ्तार के समय एक अनूठा दृश्य देखने को मिलता है। यहाँ केवल कोलंबियाई मुसलमान ही नहीं, बल्कि सीरिया, लेबनान और फिलिस्तीन से आए लोग भी एक साथ बैठकर खजूर से अपना रोजा खोलते हैं।

लैटिन और इस्लामिक संस्कृति का मेल: यहाँ के इफ्तार दस्तरख्वान पर आपको पारंपरिक अरब डिशेज के साथ-साथ कोलंबियाई पकवान जैसे 'एरेपास' (Arepas) भी देखने को मिल जाएंगे। यह इस बात का सबूत है कि इस्लाम ने कैसे स्थानीय संस्कृति में खुद को ढाल लिया है।

समुदाय की चुनौतियां

एक ईसाई बाहुल्य देश (Christian majority country) में मुस्लिम अल्पसंख्यक होना अपनी चुनौतियां लेकर आता है। कई छोटे शहरों में हलाल गोश्त की उपलब्धता एक बड़ी समस्या है। इसके लिए समुदाय के लोग अक्सर मिलकर दूर-दराज के इलाकों से इंतजाम करते हैं। मुस्लिम देशों के उलट, यहाँ रमजान के दौरान ऑफिस या स्कूलों के समय में कोई बदलाव नहीं होता। रोजेदारों को अपनी सामान्य दिनचर्या के साथ ही इबादत का समय निकालना पड़ता है।

समाज में योगदान

कोलंबियाई मुस्लिम समुदाय केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। रमजान के दौरान, ये लोग जकात (Zakat) और दान के जरिए स्थानीय गरीब कोलंबियाई लोगों की भी मदद करते हैं, चाहे वे किसी भी धर्म के हों। इस मानवीय दृष्टिकोण ने वहां के स्थानीय लोगों के मन में इस्लाम के प्रति सम्मान और जिज्ञासा पैदा की है।

उत्तर वर्ल्ड का नजरिया: विविधता में एकता

कोलंबिया की यह कहानी हमें सिखाती है कि धर्म भौगोलिक सीमाओं का मोहताज नहीं होता। लैटिन अमेरिका के बीचों-बीच गूंजती अजान की आवाज यह साबित करती है कि शांति और भाईचारे का संदेश दुनिया के हर कोने में अपनी जगह बना सकता है।

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