गाजा: गाजा पट्टी में जारी मानवीय संकट के बीच गंभीर रूप से घायल और बीमार मरीजों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रफाह क्रॉसिंग (Rafah Crossing) के जरिए होने वाले मेडिकल इवैक्यूएशन (Medical Evacuation) की प्रक्रिया इतनी सुस्त और जटिल है कि इसे अब "जानबूझकर की गई देरी" के रूप में देखा जा रहा है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, इजरायली सेना द्वारा अपनाई जा रही सख्त स्क्रीनिंग प्रक्रिया के कारण सैकड़ों मरीजों की जान जोखिम में है।
स्क्रीनिंग प्रक्रिया: मदद कम, रुकावट ज्यादा?
रफाह क्रॉसिंग के जरिए मरीजों को बाहर निकालने का आज तीसरा दिन है, लेकिन आंकड़ों की हकीकत बेहद डराने वाली है। पहले दिन केवल 5 मरीजों और उनके परिजनों को जाने की अनुमति मिली। दूसरे दिन यह संख्या बढ़कर 16 हुई। तीसरे दिन (4 फरवरी 2026) आज भी स्थिति अनिश्चित बनी रही। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और इजरायली अधिकारियों के बीच कागजी तालमेल की कमी के कारण कई मरीजों की यात्रा आखिरी समय पर रद्द कर दी गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्क्रीनिंग तंत्र इतना धीमा है कि जो केस 'लाइफ-सेविंग' (जीवन बचाने वाले) की श्रेणी में आते हैं, उन्हें भी मंजूरी मिलने में घंटों लग रहे हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि इजरायली सेना इस प्रक्रिया का उपयोग रफाह क्रॉसिंग पर आवाजाही को सीमित करने के लिए एक सोची-समझी रणनीति के तहत कर रही है।
वेस्ट बैंक में कैंसर के मामलों में भारी उछाल
दूसरी ओर, फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक और चिंताजनक आंकड़ा जारी किया है। वेस्ट बैंक (West Bank) में कैंसर के नए मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है: 2024 के आंकड़े: 3,926 नए कैंसर केस दर्ज किए गए। 2023 के आंकड़े: 3,590 केस दर्ज हुए थे। सबसे घातक: महिलाओं में 'ब्रेस्ट कैंसर' (Breast Cancer) सबसे आम पाया गया है, जिसके अकेले 584 नए मामले सामने आए हैं।
निष्कर्ष : अस्पतालों में सुविधाओं की कमी और दवाओं के अभाव के बीच, मरीजों का बाहर जाकर इलाज कराना ही एकमात्र रास्ता बचा है। लेकिन कूटनीतिक देरी और सख्त सैन्य घेराबंदी ने गाजा के पुनर्वास अस्पतालों (Rehabilitation Hospitals) में भर्ती मरीजों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।