तेहरान/वाशिंगटन: ईरान में स्कूलों को निशाना बनाकर किए गए हवाई हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई है। जहाँ एक तरफ ईरान ने इसे 'युद्ध की घोषणा' बताया है, वहीं अमेरिका और पश्चिमी देशों ने संयम बरतने की अपील की है।
महासचिव ने इसे 'अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन' बताया है और स्कूलों को निशाना बनाने की कड़ी निंदा की है। संयुक्त राष्ट्र ने सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने के संकेत दिए हैं। यूरोपीय देशों ने ईरान और इज़रायल से तत्काल युद्धविराम की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस संघर्ष का बढ़ना पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा हो सकता है। इन दोनों देशों ने हमलों को 'अनुचित' करार दिया है और इज़रायल से अपनी सैन्य कार्रवाई को तुरंत रोकने की मांग की है। रूस ने कहा कि यह हमला क्षेत्र में अस्थिरता का नया केंद्र बनेगा। सऊदी अरब, जॉर्डन और मिस्र सहित प्रमुख अरब देशों ने हमलों पर गहरा शोक व्यक्त किया है और इसे क्षेत्र की शांति के लिए 'घातक' बताया है।
ईरान ने अमेरिका को सीधे तौर पर इस हमले में इज़रायल का 'साझेदार' करार दिया है। तेहरान का कहना है कि "बिना अमेरिकी खुफिया जानकारी और लॉजिस्टिक सपोर्ट के इज़रायल ऐसा दुस्साहस नहीं कर सकता था।" व्हाइट हाउस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उन्हें हमले के बारे में पूर्व सूचना नहीं थी और वे स्थिति को शांत करने का प्रयास कर रहे हैं।
ईरान के सर्वोच्च नेता ने एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा है कि, "इस रक्तपात का बदला लेना हमारा अधिकार है। हमलावर देश को इसके लिए बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।" सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अपने छद्म संगठनों (Proxies) के जरिए या सीधे मिसाइल हमलों से जवाब दे सकता है।
इस तनाव का असर तुरंत वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखना शुरू हो गया है तेल की कीमतों में 5% से अधिक का उछाल आया है। एशियाई और यूरोपीय बाजारों में गिरावट दर्ज की गई है, क्योंकि निवेशकों को एक बड़े युद्ध की आशंका सता रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि अगले 24 से 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि ईरान कोई बड़ी जवाबी कार्रवाई करता है, तो यह संघर्ष एक पूर्ण युद्ध (Full-scale War) में बदल सकता है।