दुबई/वॉशिंगटन: ईरान और खाड़ी देशों के बीच छिड़ा 'एनर्जी वॉर' अब एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले चुका है। अल जज़ीरा की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, खाड़ी के अरब देश अकेले इस लड़ाई में नहीं हैं; उनके पीछे दुनिया की महाशक्तियों और क्षेत्रीय सहयोगियों का एक मजबूत सैन्य ढांचा खड़ा है। आइए जानते हैं कि इस युद्ध में कौन सा देश किसकी मदद कर रहा है।
अमेरिका: सबसे बड़ा सुरक्षा कवच सऊदी अरब, यूएई और कतर जैसे देशों के लिए अमेरिका सबसे बड़ा सैन्य सहयोगी बना हुआ है। अमेरिकी नौसेना का 'पांचवां बेड़ा' (Fifth Fleet) बहरीन में तैनात है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है। इसके अलावा, अमेरिका अपने पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम के जरिए ईरानी ड्रोनों और मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने में खाड़ी देशों की मदद कर रहा है।
इजरायल: खुफिया जानकारी और तकनीक 'अब्राहम एकॉर्ड्स' (Abraham Accords) के बाद इजरायल और खाड़ी देशों के बीच सैन्य सहयोग काफी बढ़ गया है। इजरायल न केवल अपनी एडवांस मिसाइल तकनीक साझा कर रहा है, बल्कि ईरान की सैन्य गतिविधियों की सटीक 'इंटेलिजेंस' भी यूएई और बहरीन को दे रहा है। इजरायली वायुसेना ने भी संकेत दिए हैं कि वह खाड़ी के ऊर्जा ठिकानों की रक्षा के लिए अपनी ताकत का इस्तेमाल कर सकती है।
यूरोप और ब्रिटेन की भूमिका: ब्रिटेन और फ्रांस ने भी अपने युद्धपोत खाड़ी क्षेत्र में भेज दिए हैं ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों को सुरक्षित रखा जा सके। ब्रिटेन विशेष रूप से कुवैत और ओमान के साथ सैन्य समन्वय (Coordination) कर रहा है ताकि ईरानी नौसेना के बढ़ते खतरों को कम किया जा सके।
ईरान का पलटवार: दूसरी तरफ, ईरान ने चेतावनी दी है कि जो भी देश अपनी जमीन का इस्तेमाल उसके खिलाफ हमले के लिए होने देगा, उसे भी युद्ध का हिस्सा माना जाएगा। उत्तर वर्ल्ड (Uttar World) आपको बता दें कि इस सैन्य ध्रुवीकरण ने दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध (World War 3) की कगार पर खड़ा कर दिया है।