तेहरान: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत ने मध्य पूर्व में एक नया सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। पिछले 37 वर्षों से ईरान की सत्ता की बागडोर संभालने वाले खामेनेई के निधन के बाद दुनिया भर के विशेषज्ञों के मन में एक ही बड़ा सवाल है—क्या यह ईरान के 'निजाम' (शासन) के अंत की शुरुआत है?
सत्ता का हस्तांतरण: क्या है ईरान का 'प्लान बी'?
ईरान के संविधान का आर्टिकल 111 बेहद स्पष्ट है। विशेषज्ञों का कहना है कि खामेनेई की मौत के बावजूद ईरान का सिस्टम बिखरने के बजाय और मजबूत हो सकता है। सत्ता किसी एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि संस्थाओं पर टिकी है:
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अंतरिम परिषद: सुप्रीम लीडर की मौत के बाद सत्ता तुरंत एक 'अंतरिम परिषद' के पास चली जाती है, जिसमें राष्ट्रपति, न्यायपालिका के प्रमुख और एक वरिष्ठ मौलवी शामिल होते हैं।
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संस्थानों का जाल: गार्डियन काउंसिल, असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स और एक्सपीडिएंसी काउंसिल—ये संस्थाएं मिलकर देश चलाती हैं। यदि एक हिस्सा फेल होता है, तो दूसरा मोर्चा संभाल लेता है।
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आईआरजीसी (IRGC) की भूमिका: इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पास मुल्क की हिफाजत का जिम्मा है। यह सिर्फ एक सेना नहीं, बल्कि ईरान की अर्थव्यवस्था और राजनीति का सबसे प्रभावशाली स्तंभ है। माना जा रहा है कि नया नेता चुनने में आईआरजीसी की रजामंदी सबसे अहम होगी।
क्या सत्ता परिवर्तन (Regime Change) संभव है?
जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिका और इजरायल का वर्तमान सैन्य ऑपरेशन महज ईरान को 'कंटेन' करने के लिए नहीं, बल्कि 'सत्ता परिवर्तन' (Regime Change) के उद्देश्य से किया गया है। लेकिन ईरान का सुरक्षा ढांचा इतना जटिल है कि उसे सिर्फ हवाई हमलों से खत्म करना लगभग असंभव है। 1980 के दशक में भी जब ईरान के कई शीर्ष नेता मारे गए थे, तब भी ईरान ने बहुत कम समय में खुद को फिर से व्यवस्थित कर लिया था।
दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा
यदि ईरान की केंद्रीय सत्ता पूरी तरह बिखरती है, तो इसके परिणाम भयावह हो सकते हैं:
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परमाणु हथियारों की अनिश्चितता: ईरान के पास मौजूद एनरिच्ड यूरेनियम और परमाणु तकनीक का रिमोट किसके हाथ में जाएगा? अराजकता की स्थिति में ये खतरनाक हथियार आतंकवादी संगठनों के हाथ लग सकते हैं।
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शरणार्थियों का सैलाब: ईरान 13 देशों के साथ सीमा साझा करता है। यदि वहां गृहयुद्ध छिड़ा, तो पलायन करने वाले लोगों का सैलाब उन पड़ोसी देशों को भी अस्थिर कर देगा जो अमेरिका के मित्र हैं।
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आतंकवादी गुटों का सक्रिय होना: कुर्द और बलूच जैसे अल्पसंख्यक गुट सत्ता की कमजोरी का फायदा उठाकर हथियार उठा सकते हैं, जिससे ईरान का भौगोलिक अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है।
निष्कर्ष
ईरान का सिस्टम 'सर्वाइवल मोड' के लिए ही डिजाइन किया गया है। खामेनेई की जगह कोई नया लीडर चुनना समय की मांग है, लेकिन यह प्रक्रिया कितनी शांत होगी, यही पूरी दुनिया की नजर का केंद्र है। आने वाले दिन तय करेंगे कि ईरान एक नई स्थिरता की ओर बढ़ेगा या मध्य पूर्व 'इराक' जैसा एक और लंबा और विनाशकारी गृहयुद्ध देखेगा।