तेहरान: ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी महायुद्ध अब सबसे वीभत्स दौर में पहुँच गया है। Al Jazeera की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से 'हस्तक्षेप' की गुहार लगाई है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका और इजराइल के हवाई हमलों ने अब रिहायशी इलाकों के साथ-साथ अस्पतालों और स्कूलों को भी अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है, जिससे भारी संख्या में आम नागरिक और बच्चे हताहत हुए हैं।
तेहरान का 'गांधी अस्पताल' हुआ क्षतिग्रस्त
ईरानी मीडिया और स्वतंत्र सूत्रों के मुताबिक, तेहरान के मशहूर गांधी अस्पताल (Gandhi Hospital) के पास हुए भीषण धमाकों से अस्पताल की इमारत को भारी नुकसान पहुँचा है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में व्हीलचेयर और मलबे के बीच से भागते मरीज और डॉक्टर देखे जा सकते हैं। हालांकि, इज़राइल का दावा है कि वह केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है, लेकिन 'कोलेटरल डैमेज' (Collateral Damage) ने अस्पतालों को भी चपेट में ले लिया है।
मीनाब में स्कूल पर हमला: 100 से अधिक बच्चों की मौत का दावा
ईरान के दक्षिणी हिस्से (मीनाब) में एक गर्ल्स स्कूल पर हुए हमले की खबर ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। ईरानी दूतावास के अनुसार, इस हमले में 100 से अधिक बच्चों और शिक्षकों की जान चली गई है। यह इस युद्ध का अब तक का सबसे दुखद और विवादास्पद अध्याय माना जा रहा है।
रेड क्रीसेंट (Red Crescent) ने की निंदा
ईरानी रेड क्रीसेंट सोसाइटी के प्रमुख पीर हुसैन कोलिवंद ने 'इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रॉस' (ICRC) को पत्र लिखकर इन हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि— "युद्ध के नियमों के तहत चिकित्सा केंद्रों और शिक्षण संस्थानों को सुरक्षा मिलनी चाहिए, लेकिन यहाँ अंतरराष्ट्रीय कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।"
'युद्ध अपराध' (War Crimes) के लग रहे आरोप
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को कहा कि अमेरिका और इजराइल अंधाधुंध तरीके से आवासीय क्षेत्रों, स्कूलों, रेड क्रीसेंट सुविधाओं और सांस्कृतिक स्मारकों पर हमले कर रहे हैं। ईरान अब इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में ले जाने की तैयारी कर रहा है।
दुनिया की प्रतिक्रिया: फ्रांस और चीन ने जताया विरोध
जहाँ डोनाल्ड ट्रंप ने इस ऑपरेशन को जारी रखने की बात कही है, वहीं फ्रांस और चीन जैसे देशों ने नागरिकों की सुरक्षा पर चिंता जताई है। यूरोपीय नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी के बिना किए जा रहे इन हमलों की वैधता पर सवाल उठाए हैं।
इतिहास गवाह है कि जब भी युद्ध अस्पतालों और स्कूलों तक पहुँचता है, तो जीत किसी की भी हो, मानवता हार जाती है। ईरान में मरे 550 से ज्यादा लोगों में बड़ी संख्या आम नागरिकों की है। अगर ये हमले नहीं रुके, तो ईरान में पैदा हो रहा गुस्सा पूरे मध्य-पूर्व को खाक कर सकता है।