कुवैत सिटी/तेहरान: मध्य पूर्व (Middle East) में जारी संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान ने खाड़ी देशों के ऊर्जा बुनियादी ढांचे (Energy Infrastructure) को निशाना बनाते हुए कुवैत की सबसे बड़ी 'मीना अल-अहमदी' (Mina Al-Ahmadi) रिफाइनरी पर लगातार दूसरे दिन भीषण ड्रोन हमला किया है। इस हमले के बाद रिफाइनरी की कई यूनिट्स में भीषण आग लग गई, जिसे बुझाने के लिए दमकल की दर्जनों टीमें मशक्कत कर रही हैं।
यह कार्रवाई ईरान की उस जवाबी रणनीति का हिस्सा है, जो इजरायल द्वारा ईरान के सबसे बड़े 'साउथ पार्स' (South Pars) गैस फील्ड पर किए गए हमले के बाद शुरू हुई है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके ऊर्जा संसाधनों को नुकसान पहुंचाया गया, तो वह पूरे खाड़ी क्षेत्र की तेल और गैस सप्लाई को ठप कर देगा। कुवैत के साथ-साथ कतर के 'रास लफान' गैस प्लांट और यूएई के ठिकानों पर भी हमले की खबरें हैं।
इन हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव जारी रहा, तो तेल की कीमतें 180 से 200 डॉलर तक जा सकती हैं, जिससे भारत सहित पूरी दुनिया में भारी महंगाई और ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है। कतर की गैस सप्लाई ठप होने से बिजली उत्पादन पर भी असर पड़ने लगा है।
जहाँ एक तरफ अमेरिका शांति की अपील कर रहा है, वहीं इजरायल ने तेहरान पर नए हवाई हमले किए हैं। इस बीच, ईरानी विदेश मंत्री ने 'जीरो रेस्टोरेंट' (Zero Restraint) की नीति अपनाने की कसम खाई है। उत्तर वर्ल्ड (Uttar World) आपको बता दें कि यह संघर्ष अब केवल दो देशों के बीच नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए 'रेड अलर्ट' बन चुका है।