नई दिल्ली (उत्तर वर्ल्ड ब्यूरो): पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध के बीच एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। मंगलवार (31 मार्च) को ईरान पर हुए ताज़ा अमेरिकी और इजरायली हवाई हमलों में ईरान की सबसे बड़ी कैंसर दवा बनाने वाली फैक्ट्री (Pharmaceutical Plant) और कई ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया गया है। इस हमले के बाद पूरे ईरान में हाहाकार मच गया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव चरम पर पहुँच गया है।
जीवन रक्षक दवाओं का संकट (Humanitarian Crisis): ईरानी सरकार के अनुसार, जिस फैक्ट्री पर हमला हुआ है, वह देश में कैंसर और एनेस्थीसिया (बेहोशी की दवा) की सप्लाई करने वाली सबसे बड़ी इकाई थी। इस हमले से ईरान में कैंसर के लाखों मरीजों के इलाज पर संकट खड़ा हो गया है। ईरानी अधिकारियों ने इसे "मानवता के खिलाफ अपराध" करार दिया है।
धार्मिक और नागरिक ठिकानों पर प्रहार: अल्जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, मिसाइलों ने न केवल सैन्य ठिकानों बल्कि घनी आबादी वाले इलाकों में स्थित धार्मिक स्थलों को भी नुकसान पहुँचाया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में मलबे के ढेर और धुएँ का गुबार देखा जा सकता है।
इजरायल और अमेरिका का पक्ष: इजरायली रक्षा मंत्रालय और पेंटागन ने इन हमलों की पुष्टि करते हुए कहा है कि उनका लक्ष्य केवल ईरान के सैन्य और रणनीतिक बुनियादी ढाँचे (Infrastructure) को तबाह करना है। हालांकि, नागरिक ठिकानों और दवा फैक्ट्री पर हुए हमले को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक सफाई नहीं दी गई है।
दुनिया भर में विरोध (Global Outrage): इस हमले के बाद दुनिया के कई देशों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। जानकारों का कहना है कि दवाओं की फैक्ट्री पर हमला युद्ध के नियमों का उल्लंघन है और इससे ईरान में मानवीय त्रासदी (Humanitarian Disaster) पैदा हो सकती है।