इस्तांबुल/तेहरान: मिडिल ईस्ट में मचे घमासान के बीच ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत की मेज पर आने के संकेत दिए हैं। शुक्रवार को तुर्की (Turkiye) के दौरे पर पहुंचे ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने कहा कि उनका देश अमेरिका के साथ "न्यायपूर्ण और समान" बातचीत के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि ईरान किसी भी तरह की सैन्य धमकी के दबाव में झुककर समझौता नहीं करेगा।
अराघची ने इस्तांबुल में अपने तुर्की समकक्ष हाकान फिदान के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कड़े लहजे में कहा, "ईरान को बातचीत से कोई समस्या नहीं है, लेकिन यह धमकियों के साये में नहीं हो सकती। मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि ईरान की रक्षा और मिसाइल क्षमताएं कभी भी बातचीत का हिस्सा नहीं होंगी।" उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरानी जनता की सुरक्षा सर्वोपरि है और देश अपनी रक्षा क्षमताओं का विस्तार करना जारी रखेगा।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर दबाव और बढ़ा दिया है। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहा कि उन्होंने ईरान को एक 'डेडलाइन' दी है। ट्रंप ने ईरान के पास अपने और अधिक जंगी जहाजों (Armada) को भेजने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा, "उम्मीद है कि हम कोई डील कर लेंगे। अगर डील होती है तो अच्छा है, नहीं तो देखते हैं क्या होता है।"
इस बीच, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से फोन पर बात की और दोनों देशों के बीच "मध्यस्थ" बनने की पेशकश की है। तुर्की का मानना है कि परमाणु वार्ता दोबारा शुरू होनी चाहिए ताकि ईरान पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाया जा सके और क्षेत्र में युद्ध के खतरे को टाला जा सके।