उतर वर्ल्ड डेस्क | मिडिल ईस्ट, 6 मार्च : बहरीन से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है जिसने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। ईरान ने बहरीन की राजधानी मनामा में स्थित इजरायली दूतावास को निशाना बनाकर एक बड़ा मिसाइल हमला करने की कोशिश की है। यह घटना आज 6 मार्च 2026 की सुबह की है जब ईरान की ओर से एक के बाद एक कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। इस हमले का मुख्य उद्देश्य बहरीन में मौजूद इजरायली राजनयिकों और वहां के दूतावास की इमारत को पूरी तरह तबाह करना था। जैसे ही ये मिसाइलें ईरान की सीमा से बाहर निकलीं पूरे क्षेत्र में युद्ध के सायरन बजने लगे और तनाव अपने चरम पर पहुँच गया।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका सऊदी अरब ने निभाई है। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि उनके उन्नत मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने ईरान की ओर से आ रही इन मिसाइलों को सऊदी हवाई क्षेत्र के ऊपर ही इंटरसेप्ट कर लिया और उन्हें बीच हवा में ही मार गिराया। अगर सऊदी अरब समय रहते यह कार्रवाई न करता तो ये मिसाइलें बहरीन में भारी तबाही मचा सकती थीं और इजरायली दूतावास के साथ-साथ आसपास के रिहायशी इलाकों में भी सैकड़ों बेगुनाह लोगों की जान जा सकती थी। सऊदी अरब की इस मुस्तैदी ने एक बहुत बड़े कत्लेआम को टाल दिया है लेकिन इससे ईरान और सऊदी अरब के बीच पहले से जारी तनाव अब और ज्यादा गहरा गया है।
इजरायल की सरकार ने इस हमले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इसे अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला करार दिया है। इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से आए बयान में कहा गया है कि ईरान अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आ रहा है और वह पूरी दुनिया की शांति को खतरे में डाल रहा है। इजरायल ने चेतावनी दी है कि वह इस हमले का बदला अपनी मर्जी की जगह और समय पर लेगा। इजरायली सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इजरायल का कहना है कि वह अपने राजनयिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है और इस बार वह ईरान को ऐसा सबक सिखाएगा जिसे वह लंबे समय तक याद रखेगा।
ईरान की ओर से इस हमले को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक सफाई नहीं आई है लेकिन तेहरान के सैन्य हलकों में इस बात की चर्चा है कि यह हमला पिछले दिनों सीरिया में हुए इजरायली हमले का बदला हो सकता है। ईरान हमेशा से बहरीन और इजरायल के बीच बढ़ते रिश्तों का विरोध करता रहा है और वह मनामा में इजरायली दूतावास की मौजूदगी को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता है। अंतरराष्ट्रीय जानकारों का कहना है कि ईरान इस तरह के हमले करके अमेरिका और इजरायल को यह दिखाना चाहता है कि वह इस क्षेत्र में किसी भी लक्ष्य को निशाना बनाने की ताकत रखता है।
बहरीन की सरकार ने भी इस कायराना हमले की कड़ी निंदा की है। बहरीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उनकी धरती पर किसी भी विदेशी दूतावास को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है। बहरीन ने साफ कर दिया है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और उसे अपने सहयोगियों का पूरा समर्थन हासिल है। इस घटना के बाद मनामा में सुरक्षा घेरा बेहद कड़ा कर दिया गया है और इजरायली दूतावास के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है। बहरीन के लोगों में भी इस हमले को लेकर काफी गुस्सा और डर का माहौल देखा जा रहा है।
अमेरिका ने भी इस मामले में तुरंत दखल देते हुए ईरान को कड़ी चेतावनी जारी की है। व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अमेरिका अपने सहयोगियों इजरायल, सऊदी अरब और बहरीन की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े को जो बहरीन में ही तैनात है उसे भी सतर्क रहने को कहा गया है। अमेरिका का मानना है कि ईरान इस तरह की हरकतों से पूरे वैश्विक तेल बाजार और सप्लाई चेन को बाधित करना चाहता है जिससे दुनिया भर में आर्थिक संकट पैदा हो सकता है। जो बाइडन प्रशासन इस मुद्दे पर मित्र देशों के साथ लगातार संपर्क में है और संयुक्त राष्ट्र में भी इस मामले को उठाने की तैयारी कर रहा है।
सऊदी अरब की भूमिका ने इस बार दुनिया को हैरान कर दिया है क्योंकि पिछले कुछ समय से वह ईरान के साथ रिश्तों को सुधारने की कोशिश कर रहा था। लेकिन इस मिसाइल हमले ने यह साबित कर दिया है कि सुरक्षा के मुद्दे पर सऊदी अरब किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है। सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान खुद इस पूरी स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं। सऊदी रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि उनके डिफेंस सिस्टम ने बहुत ही कम समय में इन मिसाइलों को ट्रैक किया और उन्हें नष्ट कर दिया जो उनकी सैन्य ताकत का एक बड़ा प्रदर्शन है।
यूरोपीय देशों ने भी इस घटना पर चिंता जाहिर की है। फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन ने एक साझा बयान में कहा है कि मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने की जरूरत है न कि इसे और भड़काने की। इन देशों ने ईरान से अपील की है कि वह इस तरह की आक्रामक कार्रवाइयों को तुरंत रोके क्योंकि इससे एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की शुरुआत हो सकती है। रूस और चीन ने भी शांति बनाए रखने की अपील की है हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर किसी पक्ष का नाम नहीं लिया है। दुनिया भर के शेयर बाजारों में भी इस खबर के बाद गिरावट देखी जा रही है और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने की संभावना जताई जा रही है।
जानकारों का मानना है कि आने वाले 48 घंटे पूरे मिडिल ईस्ट के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं। अगर इजरायल ने ईरान के अंदर किसी सैन्य अड्डे या परमाणु केंद्र को निशाना बनाया तो यह मामला हाथ से निकल सकता है। ईरान ने भी धमकी दी है कि अगर उसके खिलाफ कोई भी कार्रवाई हुई तो वह पूरे क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी अड्डों को अपना निशाना बनाएगा। इस वक्त पूरी दुनिया की नज़रें मिडिल ईस्ट पर टिकी हैं क्योंकि यहाँ से उठने वाली चिंगारी पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले सकती है।
बहरीन में रहने वाले भारतीय समुदाय के लोग भी इस घटना से डरे हुए हैं क्योंकि वहां बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं। भारतीय दूतावास ने भी अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है और उन्हें भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है। हालांकि अभी तक किसी भारतीय के हताहत होने की खबर नहीं है लेकिन स्थिति को देखते हुए हर कोई आशंकित है। व्यापारिक जहाजों को भी इस रूट से बचकर निकलने के निर्देश दिए गए हैं ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
युद्ध के विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान इस हमले के जरिए सऊदी अरब की रक्षा क्षमता को भी टेस्ट करना चाहता था। वह देखना चाहता था कि क्या सऊदी अरब वाक़ई में मिसाइल हमलों को रोकने में सक्षम है। सऊदी अरब की कामयाबी ने ईरान के प्लान को फिलहाल फेल कर दिया है। लेकिन ईरान की ड्रोन और मिसाइल तकनीक लगातार विकसित हो रही है जो आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी। इजरायल और सऊदी अरब के बीच पर्दे के पीछे बढ़ती नजदीकियों ने ईरान की बेचैनी को और बढ़ा दिया है जो इस तरह के हमलों के रूप में बाहर निकल रही है।
अंत में यह कहा जा सकता है कि मिडिल ईस्ट एक ऐसे ज्वालामुखी पर बैठा है जो कभी भी फट सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस मामले में तुरंत ठोस कदम उठाने होंगे ताकि स्थिति को और बिगड़ने से रोका जा सके। कूटनीतिक रास्तों से बात बनती नहीं दिख रही है क्योंकि यहाँ हर पक्ष अपनी ताकत दिखाने पर तुला हुआ है। अगर यह विवाद इसी तरह बढ़ता रहा तो 2026 का यह साल दुनिया के लिए एक बहुत बड़े संकट का साल साबित हो सकता है। अब देखना होगा कि इजरायल का अगला कदम क्या होता है और ईरान इस विफलता के बाद अपनी रणनीति में क्या बदलाव करता है।