तेहरान : जनवरी की सर्द हवाओं के बीच मध्य पूर्व का तापमान एक बार फिर दहक उठा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब उस मुकाम पर पहुंच गया है जहां कूटनीति की मेज छोटी और युद्ध के मैदान बड़े नजर आ रहे हैं। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की सीमाओं के करीब एक विशाल नौसैनिक बेड़े यानी जहाजी बेड़ा (Armada) की तैनाती कर सीधी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है, तो दूसरी तरफ तेहरान ने अपनी "200 प्रतिशत सैन्य तैयारी" का ऐलान करते हुए 1,000 नए घातक ड्रोन्स को अपनी सेना के बेड़े में शामिल कर लिया है। यह स्थिति पिछले साल जून में हुए 12 दिनों के संक्षिप्त युद्ध के बाद सबसे गंभीर सैन्य जमावड़ा मानी जा रही है।
हवा में मौत का साया: ईरान की नई 'ड्रोन' दीवार ईरान ने इस बार रक्षा के लिए केवल मिसाइलों पर नहीं, बल्कि मानवरहित युद्ध प्रणालियों (Drones) पर दांव लगाया है। सेना प्रमुख अमीर हमती के निर्देश पर शामिल किए गए ये 1,000 ड्रोन्स आत्मघाती हमले, जासूसी और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में माहिर हैं। ईरान का दावा है कि ये ड्रोन्स जमीन, हवा और समुद्र में किसी भी गतिशील लक्ष्य को पलक झपकते ही तबाह कर सकते हैं। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि ईरान 'असिमेट्रिक वॉरफेयर' (असमान युद्ध) की रणनीति अपना रहा है, ताकि अमेरिकी नौसैनिक बेड़े के भारी-भरकम जहाजों को छोटे और तेज ड्रोन्स से निशाना बनाया जा सके।
घर के भीतर विद्रोह और सीमा पर ट्रंप का 'विशालकाय जहाज़ी बेड़ा' ईरान के लिए यह दोहरी चुनौती का समय है। देश के भीतर हाल ही में हुई भीषण आर्थिक मंदी और रियाल की गिरावट के कारण हुए विरोध प्रदर्शनों ने सरकार की नींव हिला दी है। वॉशिंगटन का आरोप है कि तेहरान ने अपने ही नागरिकों पर कठोर कार्रवाई की है, जिसे ट्रंप प्रशासन सैन्य हमले के लिए एक आधार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। ट्रंप के 'विशालकाय जहाज़ी बेड़ा' का नेतृत्व 'यूएसएस अब्राहम लिंकन' विमान वाहक पोत कर रहा है, जो फारस की खाड़ी के मुहाने पर तैनात है। अमेरिका का कहना है कि वे किसी भी वक्त "सटीक हमले" (Precision Strikes) के लिए तैयार हैं।
कूटनीति की आखिरी उम्मीद: तुर्की की मध्यस्थता युद्ध की इन आहटों के बीच तुर्की एक बार फिर संकटमोचक की भूमिका में नजर आ रहा है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची शुक्रवार को अंकारा में उच्च स्तरीय वार्ता करेंगे, जहां तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान संघर्ष को टालने का आखिरी प्रस्ताव रख सकते हैं। तुर्की को डर है कि अगर ईरान में युद्ध छिड़ा, तो इससे पैदा होने वाला मानवीय संकट और शरणार्थियों का सैलाब पूरे क्षेत्र की स्थिरता को खत्म कर देगा। हालांकि, ईरान के शीर्ष अधिकारियों का कहना है कि वे अब "खोखली बातचीत" के बजाय अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए "फिंगर ऑन द ट्रिगर" यानी जवाबी हमले के लिए तैयार खड़े हैं।
आम जनता के बीच खौफ और तैयारी तेहरान की गलियों में देशभक्ति के नारों के साथ-साथ एक गहरा डर भी समाया हुआ है। सरकार ने सीमावर्ती प्रांतों को आपातकालीन स्थिति में भोजन और आवश्यक वस्तुओं के आयात की छूट दे दी है। वहीं, तेहरान जैसे बड़े शहरों में 'अंडरग्राउंड पार्किंग शेल्टर्स' बनाने की योजना पर काम शुरू किया गया है। लोगों को डर है कि एक नया युद्ध न केवल बुनियादी ढांचे को तबाह करेगा, बल्कि संचार के साधन और इंटरनेट भी पूरी तरह ठप कर दिए जाएंगे। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें फारस की खाड़ी पर टिकी हैं, जहां एक भी चिंगारी महायुद्ध का रूप ले सकती है।