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ईरान-अमेरिका युद्ध का 35वां दिन: करज पुल की तबाही से थर्राया तेहरान, हॉर्मुज की नाकेबंदी ने दुनिया को 'ब्लैकआउट' की कगार पर धकेला

By Uttar World Desk

03 अप्र, 2026 | 03:16 बजे
ईरान-अमेरिका युद्ध का 35वां दिन: करज पुल की तबाही से थर्राया तेहरान, हॉर्मुज की नाकेबंदी ने दुनिया को 'ब्लैकआउट' की कगार पर धकेला

तेहरान/वॉशिंगटन, 03 अप्रैल (उत्तर वर्ल्ड डेस्क): मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भीषण संघर्ष आज अपने 35वें दिन में प्रवेश कर चुका है। पिछले पांच हफ्तों से जारी इस युद्ध ने अब एक ऐसी शक्ल अख्तियार कर ली है, जिससे तीसरे विश्व युद्ध (World War 3) की आहट साफ सुनाई देने लगी है। अल जजीरा की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में हुए अमेरिकी और इजरायली हमलों ने ईरान के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचाया है, जिसके जवाब में ईरान ने "विनाशकारी प्रतिशोध" की कसम खाई है।

करज पुल का विनाश: अमेरिका का 'सर्जिकल स्ट्राइक'

युद्ध के 35वें दिन की सबसे बड़ी घटना ईरान के करज (Karaj) शहर में हुई। अमेरिकी वायुसेना ने एक सटीक हमले में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण B1 पुल को मलबे के ढेर में बदल दिया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले की पुष्टि करते हुए इसे ईरान की "कमर तोड़ने वाला प्रहार" बताया है।

यह पुल न केवल तेहरान और करज को जोड़ता था, बल्कि ईरानी सेना के लिए रसद (Logistics) पहुंचाने का मुख्य मार्ग भी था। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में भारी संख्या में नागरिक हताहत हुए हैं और शहर की कनेक्टिविटी पूरी तरह टूट गई है। मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है, लेकिन लगातार हो रही ड्रोन उड़ानों के कारण बचाव कार्य में बाधा आ रही है।

इजरायल का 'ऑपरेशन सराउंड': सीरिया और लेबनान में बमबारी

इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने 35वें दिन अपनी कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए ईरान के बाहर मौजूद उसके 'प्रॉक्सि' ठिकानों पर भीषण हमले किए हैं। सीरिया और लेबनान में ईरानी हथियारों के डिपो और कमांड सेंटरों को निशाना बनाया गया है। इजरायल का लक्ष्य ईरान की 'सप्लाई चेन' को काटना है ताकि वह इजरायली शहरों पर मिसाइल हमले न कर सके।

इजरायली प्रधानमंत्री ने बयान जारी कर कहा है कि "जब तक ईरान अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं और आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद नहीं करता, हमारे फाइटर जेट्स शांत नहीं बैठेंगे।"

हॉर्मुज की नाकेबंदी: तेल और गैस का वैश्विक संकट

दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री सड़क, 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz), आज 35वें दिन भी ईरान के कड़े नियंत्रण में है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उस पर हमले बंद नहीं होते, वह किसी भी कमर्शियल टैंकर को गुजरने नहीं देगा।

इसका सीधा असर वैश्विक बाजारों पर दिख रहा है:

  • तेल की कीमतें: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल $100 प्रति बैरल के पार जाने को तैयार है।

  • गैस किल्लत: भारत, जापान और यूरोपीय देशों में एलपीजी (LPG) और एलएनजी (LNG) की भारी कमी हो गई है।

  • शिपिंग लागत: समुद्री जहाजों का बीमा (Insurance) और रूट बदलने का खर्च 400% तक बढ़ गया है, जिससे दुनिया भर में महंगाई का नया दौर शुरू हो गया है।

ईरान का 'रेड लाइन' अल्टीमेटम

ईरान के सर्वोच्च नेता और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने 35वें दिन एक वीडियो संदेश जारी कर अमेरिका और उसके सहयोगियों को चेतावनी दी है। ईरान ने कहा है कि यदि उसके परमाणु ठिकानों (Nuclear Sites) को छूने की कोशिश की गई, तो वह पूरे मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को "कब्रिस्तान" बना देगा। ईरान ने 'हिट लिस्ट' जारी की है जिसमें खाड़ी देशों के प्रमुख पुल और रिफाइनरी शामिल हैं।

मानवीय संकट और दुनिया की चुप्पी

युद्ध के 35 दिनों के भीतर ईरान के भीतर एक बड़ा मानवीय संकट पैदा हो गया है। अल जजीरा की रिपोर्ट बताती है कि तेहरान सहित कई बड़े शहरों में दवाइयों और बच्चों के दूध की भारी कमी है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अभी भी कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है, क्योंकि महाशक्तियां अपने-अपने हितों के लिए वीटो (Veto) का इस्तेमाल कर रही हैं।

भारत पर असर: नाविकों की शहादत और आर्थिक चोट

भारत के लिए यह युद्ध केवल खबर नहीं बल्कि एक व्यक्तिगत त्रासदी बन चुका है। भारत सरकार ने पुष्टि की है कि हॉर्मुज की नाकेबंदी के दौरान हुए हमलों में भारतीय नाविकों (Mariners) की जान गई है। इसके अलावा, भारत के औद्योगिक शहर, जैसे कानपुर, ऊर्जा संकट के कारण उत्पादन ठप होने की कगार पर हैं।

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