मंगलवार, 17 मार्च 2026
अंतर्राष्ट्रीय

ईरान में महासंकट सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब युद्ध के बीच हुई पहली जुमे की नमाज

By Uttar World Desk

06 मा, 2026 | 05:57 बजे
ईरान में महासंकट सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब युद्ध के बीच हुई पहली जुमे की नमाज

उत्तर वर्ल्ड न्यूज़ डेस्क | तेहरान : ईरान के इतिहास में आज का दिन सबसे दुखद और चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर ने पूरे देश को गहरे शोक में डुबो दिया है। यह दुख तब और बढ़ गया है जब देश पहले से ही अमेरिका और इजरायल के साथ एक भीषण युद्ध का सामना कर रहा है। शुक्रवार 6 मार्च 2026 को तेहरान की सड़कों पर लाखों की संख्या में ईरानी नागरिक जमा हुए हैं ताकि वे अपने नेता को अंतिम विदाई दे सकें और युद्ध के इस कठिन समय में पहली जुमे की नमाज अदा कर सकें। तेहरान के मुसल्ला इमाम खुमैनी परिसर में उमड़ी यह भीड़ ईरान की एकता और उनके संकल्प का प्रदर्शन कर रही है। चारों तरफ काले झंडे लहरा रहे हैं और हवा में मातम के साथ-साथ बदले की भावना भी साफ़ महसूस की जा सकती है।

अली खामेनेई की मौत ऐसे वक्त में हुई है जब ईरान की राजधानी तेहरान पर इजरायली और अमेरिकी विमानों की बमबारी जारी है। इसके बावजूद जुमे की नमाज के लिए जुटी भीड़ ने यह साबित कर दिया है कि वे अपने देश और अपने नेतृत्व के प्रति पूरी तरह वफादार हैं। नमाज के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और आसमान में ईरानी वायुसेना के विमान लगातार गश्त कर रहे थे ताकि किसी भी संभावित हवाई हमले को रोका जा सके। नमाज पढ़ने आए लोगों की आंखों में आंसू थे लेकिन उनके नारों में युद्ध जीतने का जोश भी दिखाई दे रहा था। ईरानी मीडिया के अनुसार यह नमाज केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं थी बल्कि यह दुनिया को एक कड़ा संदेश देने की कोशिश थी कि नेतृत्व के खोने के बाद भी ईरान कमजोर नहीं पड़ा है।

खामेनेई के निधन के बाद ईरान में सत्ता के उत्तराधिकार को लेकर भी कयासों का दौर शुरू हो गया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी किसी नए नाम का ऐलान नहीं किया गया है लेकिन विशेषज्ञ मान रहे हैं कि ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी आईआरजीसी अब देश की कमान पूरी तरह अपने हाथों में ले सकती है। युद्ध के इस माहौल में सेना का वर्चस्व बढ़ना स्वाभाविक है। नमाज के बाद दिए गए खुतबे में इमाम ने कहा कि अली खामेनेई का मिशन अधूरा नहीं रहेगा और उनके बताए रास्ते पर चलते हुए इजरायल और अमेरिका को करारा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने जनता से अपील की कि वे इस मुश्किल घड़ी में धैर्य रखें और अपनी सेना का मनोबल बढ़ाएं।

तेहरान की सड़कों पर जो मंजर आज देखा गया वह हैरान करने वाला था। एक तरफ आसमान से गिरते बमों का डर था तो दूसरी तरफ अपने नेता की मौत का गम। लोग अपनी जान की परवाह किए बिना नमाज के लिए घरों से बाहर निकले। बुज़ुर्ग महिलाएं और बच्चे भी इस भीड़ का हिस्सा थे जो खामेनेई की तस्वीरें हाथों में लिए रो रहे थे। ईरान के अन्य बड़े शहरों जैसे मशहद और इस्फ़हान में भी इसी तरह के दृश्य देखने को मिले जहाँ लाखों लोगों ने सांकेतिक नमाज अदा की और अपने नेता को याद किया। इस घटना ने ईरानी जनता के बीच राष्ट्रवाद की एक नई लहर पैदा कर दी है जो युद्ध के मैदान में इजरायल के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकती है।

अमेरिका और इजरायल की ओर से इस मौत पर अभी तक कोई बड़ी प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन खुफिया एजेंसियां ईरान के अगले कदम पर बारीकी से नज़र रखे हुए हैं। इजरायली सेना ने अपने हमलों को थोड़ा धीमा किया है ताकि यह देखा जा सके कि खामेनेई के बाद ईरान का नया नेतृत्व किस तरह की रणनीति अपनाता है। कुछ जानकारों का कहना है कि नेतृत्व में बदलाव के दौरान ईरान और भी ज्यादा आक्रामक हो सकता है क्योंकि वह अपनी ताकत का प्रदर्शन करना चाहेगा। वहीं कुछ का मानना है कि अंदरूनी कलह और शोक के कारण ईरान कुछ समय के लिए रक्षात्मक मुद्रा में भी आ सकता है।

ईरान में इंटरनेट और संचार सेवाओं की भारी किल्लत के बावजूद सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो सामने आए हैं जिनमें तेहरान की मस्जिदों के बाहर भारी सुरक्षा बल तैनात दिख रहे हैं। नमाज के दौरान किसी भी संदिग्ध गतिविधि को रोकने के लिए सादे लिबास में भी सुरक्षाकर्मी भीड़ के बीच मौजूद थे। सरकार ने देश में 40 दिनों के शोक का ऐलान किया है और सभी सरकारी इमारतों पर राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुका दिया गया है। पड़ोसी देशों जैसे इराक और लेबनान में भी खामेनेई की मौत पर शोक जताया गया है और वहां के शिया समुदायों ने भी विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की हैं।

युद्ध के मोर्चे पर स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। तेहरान के बाहरी इलाकों में आज सुबह भी धमाकों की आवाज़ सुनी गई थी लेकिन जुमे की नमाज के मुख्य समय के दौरान आसमान में सन्नाटा रहा। ऐसा माना जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण इजरायल ने नमाज के वक्त हमला नहीं किया ताकि किसी बड़े नागरिक नरसंहार से बचा जा सके। हालांकि ईरानी सेना ने इसे अपनी सफलता बताया है और कहा है कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने दुश्मन के विमानों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।

आर्थिक मोर्चे पर भी ईरान के लिए चुनौतियां कम नहीं हैं। सर्वोच्च नेता की मौत और जारी युद्ध के कारण ईरानी मुद्रा रियाल की कीमत में भारी गिरावट आई है। बाज़ार बंद हैं और ज़रूरी सामान की सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो चुकी है। नमाज के बाद कई लोगों ने शिकायत की कि उनके पास खाने-पीने का सामान खत्म हो रहा है और अस्पतालों में दवाइयों की कमी है। इसके बावजूद लोग अपने नेता के लिए सड़कों पर डटे हुए हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि ईरान की नई सरकार किस तरह से इन आर्थिक और सैन्य चुनौतियों का एक साथ सामना करती है।

संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने ईरान से अपील की है कि वह सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया को शांतिपूर्ण तरीके से पूरा करे और क्षेत्र में और तनाव न बढ़ाए। रूस और चीन ने अली खामेनेई के निधन पर शोक व्यक्त किया है और उन्हें एक दूरदर्शी नेता बताया है। इन दोनों देशों ने एक बार फिर अमेरिका और इजरायल से युद्ध रोकने की अपील की है। भारत में भी कई मुस्लिम संगठनों ने खामेनेई की मौत पर दुख जताया है और दुनिया में शांति की कामना की है।

ईरान के भविष्य को लेकर अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या खामेनेई की मौत के बाद ईरान अपनी कट्टर नीतियों में कुछ ढील देगा या फिर युद्ध की आग और भड़क जाएगी? तेहरान की आज की भीड़ को देखकर तो यही लगता है कि देश अभी झुकने को तैयार नहीं है। नमाज खत्म होने के बाद भीड़ ने जो नारे लगाए वे अमेरिका के खिलाफ थे। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि आने वाले दिन मिडिल ईस्ट के लिए और भी खतरनाक हो सकते हैं।

खामेनेई ने दशकों तक ईरान पर राज किया और वे पश्चिम विरोधी नीतियों के मुख्य सूत्रधार थे। उनकी मौत ईरान के लिए एक युग का अंत है। जो लोग आज नमाज में शामिल हुए उनका मानना है कि खामेनेई एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक विचारधारा थे जो उनके दिलों में हमेशा ज़िंदा रहेगी। जुमे की नमाज के बाद तेहरान में एक विशाल शोक जुलूस भी निकाला गया जिसे रोकने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी क्योंकि बमबारी का खतरा अभी टला नहीं है।

अब सबकी नज़रें तेहरान के अगले आधिकारिक बयान पर हैं जिसमें नए सर्वोच्च नेता के नाम का खुलासा हो सकता है। क्या यह कोई धार्मिक गुरु होगा या फिर सेना का कोई जनरल? यह फैसला तय करेगा कि मिडिल ईस्ट में शांति लौटेगी या फिर 2026 का यह साल एक महायुद्ध के रूप में दर्ज होगा। फिलहाल ईरान की राजधानी मातम और युद्ध की गूंज के बीच अपने सबसे कठिन दौर से गुज़र रही है।

Uttar World News on Facebook

खबरों की पल-पल की अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को अभी लाइक करें।

अभी Like करें