तेहरान: मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष ने शनिवार को एक बेहद खौफनाक और दुखद मोड़ ले लिया। आधिकारिक सूत्रों और स्थानीय मीडिया के अनुसार, ईरान के दो अलग-अलग क्षेत्रों में स्कूलों को निशाना बनाकर किए गए इजरायली हवाई हमलों (Airstrikes) में 50 से अधिक लोगों की जान चली गई है, जिनमें बड़ी संख्या में बच्चे शामिल हैं।
ईरान के दो अलग-अलग शहरों में स्थित दो स्कूलों को हवाई हमलों में तबाह कर दिया गया। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, मरने वालों की संख्या 50 से अधिक है और दर्जनों अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। मलबे के नीचे अभी भी कई लोगों के दबे होने की आशंका है। हमले के बाद घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। ईरानी प्रशासन ने इसे 'मानवता के खिलाफ अपराध' करार दिया है।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने इस हमले की तीखी निंदा करते हुए कहा कि, "इजरायल ने अब सभी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और नैतिक मूल्यों को लांघ दिया है। स्कूलों पर हमला करना इस बात का सबूत है कि उनका लक्ष्य केवल सैन्य नहीं, बल्कि नागरिक आबादी को डराना है।" ईरान ने इसके जवाब में 'उचित और कठोर' कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।
इजरायली रक्षा बल (IDF) ने इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया है, हालांकि प्रारंभिक सैन्य सूत्रों का दावा है कि स्कूलों का उपयोग सैन्य गतिविधियों या हथियारों के भंडारण के लिए किया जा रहा था। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस दावे की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है।
संयुक्त राष्ट्र (UN) ने तत्काल युद्धविराम की अपील की है और स्कूलों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है। महासचिव ने कहा, "नागरिकों और विशेष रूप से बच्चों की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जानी चाहिए।" इस हमले के बाद वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ने की आशंका है। कई देशों ने अपने नागरिकों को क्षेत्र की यात्रा न करने की सलाह दी है।
यह घटना पहले से ही सुलग रहे मध्य-पूर्व में बारूद के ढेर में चिंगारी का काम कर सकती है। अब देखना यह है कि ईरान का अगला कदम क्या होगा और क्या वैश्विक शक्तियां इस बढ़ते हुए सैन्य टकराव को रोक पाने में सक्षम होंगी।