कराची / इस्लामाबाद : ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों की तपिश अब पाकिस्तान पहुँच गई है। सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबरों के बाद पाकिस्तान के कई शहर युद्ध का मैदान बन गए हैं। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि शाहबाज शरीफ सरकार ने पूरे देश में 3 दिनों के कड़े कर्फ्यू का ऐलान कर दिया है और कानून-व्यवस्था संभालने के लिए सेना (Army) को सड़कों पर उतार दिया गया है।
UttarWorld की इस विशेष रिपोर्ट में पढ़ें पाकिस्तान के मौजूदा हालात का पूरा ब्योरा इस प्रकार रहा - ईरान के समर्थन में रविवार से शुरू हुए शांतिपूर्ण मार्च ने सोमवार को हिंसक रूप ले लिया। कराची और इस्लामाबाद में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच सीधी भिड़ंत हुई। भीड़ ने सरकारी संपत्तियों और वाहनों को आग के हवाले कर दिया। अब तक हुई हिंसा में कम से कम 24 लोगों के मारे जाने और 150 से अधिक के घायल होने की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। मृतकों में कुछ सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं।
अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए पाकिस्तान सरकार ने पूरे देश में इंटरनेट सेवाएं (Mobile Data) और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (X, Facebook, WhatsApp) को अनिश्चितकाल के लिए ब्लॉक कर दिया है। सरकार का मानना है कि प्रदर्शनकारी सोशल मीडिया के जरिए भीड़ इकट्ठा कर रहे हैं।
गृह मंत्रालय के आदेश के बाद रावलपिंडी, लाहौर, कराची और क्वेटा जैसे संवेदनशील शहरों में सेना ने मोर्चा संभाल लिया है। 'देखते ही गोली मारने' (Shoot-at-sight) के आदेश की भी खबरें आ रही हैं। लोगों को घरों के अंदर रहने की सख्त हिदायत दी गई है और सभी स्कूल-कॉलेज और दफ्तर बंद कर दिए गए हैं।
पाकिस्तान में फैली यह अराजकता भारत के लिए दोहरी चुनौती है: पाकिस्तान में आंतरिक विद्रोह के दौरान अक्सर सीमा (LOC/IB) पर घुसपैठ की कोशिशें बढ़ जाती हैं। कट्टरपंथी समूहों का उग्र होना भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि पाकिस्तान के अशांत होने का असर जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति पर पड़ सकता है।
पाकिस्तान पहले से ही गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है, ऐसे में यह गृह युद्ध जैसे हालात उसकी कमर तोड़ सकते हैं। अमेरिका-इजराइल और ईरान की जंग अब केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने दक्षिण एशिया के सबसे अस्थिर परमाणु शक्ति संपन्न देश को अपनी चपेट में ले लिया है।