मंगलवार, 17 मार्च 2026
अंतर्राष्ट्रीय

तेहरान दहला सातवें दिन अमेरिका और इजरायल ने ईरान की राजधानी पर की भीषण बमबारी कई सरकारी इमारतें जमींदोज

By Uttar World Desk

06 मा, 2026 | 05:43 बजे
तेहरान दहला सातवें दिन अमेरिका और इजरायल ने ईरान की राजधानी पर की भीषण बमबारी कई सरकारी इमारतें जमींदोज

उत्तर वर्ल्ड डेस्क तेहरान : ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच छिड़े महायुद्ध का आज सातवां दिन है और स्थिति अब नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है। शुक्रवार 6 मार्च 2026 की सुबह ईरान की राजधानी तेहरान पर अब तक का सबसे भीषण हवाई हमला किया गया है। अमेरिका और इजरायल के लड़ाकू विमानों ने तेहरान के आकाश में घुसकर एक के बाद एक कई मिसाइलें दागीं और बमबारी की जिससे पूरी राजधानी दहल गई है। इस हमले का मुख्य लक्ष्य ईरान के सैन्य ठिकाने और महत्वपूर्ण सरकारी इमारतें थीं लेकिन धमाकों की आवाज़ कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई और आसमान में काले धुएं का गुबार छा गया है। सात दिनों से चल रहे इस युद्ध ने अब एक ऐसा मोड़ ले लिया है जहाँ से पीछे हटना किसी भी पक्ष के लिए मुमकिन नहीं लग रहा है।

तेहरान से आ रही शुरुआती खबरों के मुताबिक इजरायली वायुसेना के एफ-35 विमानों ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देते हुए शहर के मध्य हिस्से में भारी बमबारी की है। इस हमले में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के मुख्यालय और कई खुफिया केंद्रों को निशाना बनाया गया है। धमाके इतने ज़ोरदार थे कि आसपास की रिहायशी इमारतों की खिड़कियां टूट गईं और लोग दहशत में अपने घरों से निकलकर सुरक्षित स्थानों और बंकरों की ओर भागने लगे। ईरान की सरकार ने दावा किया है कि उनके डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइलों को मार गिराया है लेकिन जिस तरह की तबाही तेहरान की सड़कों पर दिख रही है उससे साफ है कि कई लक्ष्य पूरी तरह तबाह हो चुके हैं।

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा है कि यह कार्रवाई ईरान की ओर से पिछले दिनों किए गए मिसाइल हमलों का जवाब है। अमेरिका का कहना है कि उसने केवल उन्हीं ठिकानों को निशाना बनाया है जहाँ से ईरान अपनी सैन्य गतिविधियों का संचालन कर रहा था। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने एक संक्षिप्त बयान में कहा है कि उनका देश इजरायल की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और ईरान को अपनी आक्रामकता की कीमत चुकानी होगी। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि जब तक ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों और हमास जैसे समूहों को समर्थन देना बंद नहीं करता तब तक यह सैन्य अभियान जारी रहेगा। सातवें दिन की यह बमबारी ईरान की कमर तोड़ने के इरादे से की गई है।

ईरान के सर्वोच्च नेता और राष्ट्रपति की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है लेकिन तेहरान की सड़कों पर भारी गुस्सा और आक्रोश देखा जा रहा है। ईरानी सेना ने जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है और कहा है कि वे अमेरिका और इजरायल के इस दुस्साहस का बदला लेने के लिए तैयार हैं। ईरान ने अपनी लंबी दूरी की मिसाइलों को दागने के लिए तैनात कर दिया है और संभावना जताई जा रही है कि आने वाले कुछ घंटों में इजरायल के तेल अवीव या हाइफा जैसे शहरों पर बड़ा हमला हो सकता है। ईरान ने खाड़ी देशों को भी चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने अपनी ज़मीन का इस्तेमाल अमेरिकी विमानों के लिए होने दिया तो उन्हें भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

इस युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट में मानवीय संकट गहराता जा रहा है। तेहरान में बिजली और इंटरनेट की सेवाएं पूरी तरह ठप हो गई हैं और अस्पतालों में घायलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। दवाइयों और ज़रूरी सामान की भारी किल्लत हो गई है क्योंकि सप्लाई चेन पूरी तरह कट चुकी है। संयुक्त राष्ट्र ने दोनों पक्षों से तुरंत युद्धविराम की अपील की है लेकिन युद्ध के मैदान में अभी शांति की कोई गुंजाइश नज़र नहीं आ रही है। लाखों लोग ईरान की सीमा छोड़कर सुरक्षित देशों की ओर पलायन करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन पड़ोसी देशों ने अपनी सीमाओं को सील कर दिया है जिससे अफरा-तफरी का माहौल है।

अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में इस युद्ध का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिख रहा है। तेल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं और दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। रूस और चीन ने इस हमले की निंदा की है और कहा है कि अमेरिका और इजरायल की यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है। रूस ने चेतावनी दी है कि वह इस संकट में मूकदर्शक बनकर नहीं बैठेगा और अगर ज़रूरत पड़ी तो वह अपने मित्र देश ईरान की मदद के लिए कदम उठा सकता है। दूसरी ओर यूरोपीय देश इस मामले में बंटे हुए नज़र आ रहे हैं हालांकि उन्होंने शांति बनाए रखने की अपील की है।

इजरायली रक्षा मंत्री ने कहा है कि उनका अभियान तब तक नहीं रुकेगा जब तक ईरान की सैन्य क्षमता को पूरी तरह खत्म नहीं कर दिया जाता। इजरायल का आरोप है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम के बहुत करीब पहुँच चुका है जो उसके अस्तित्व के लिए खतरा है। सातवें दिन के इस हमले में ईरान के कई अंडरग्राउंड परमाणु संयंत्रों को भी निशाना बनाने की अपुष्ट खबरें आ रही हैं। अगर यह सच साबित होता है तो पूरे क्षेत्र में परमाणु विकिरण का खतरा भी पैदा हो सकता है जो एक वैश्विक आपदा में बदल सकता है।

भारत समेत दुनिया के कई देशों ने अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह दी है। दिल्ली में विदेश मंत्रालय स्थिति पर बारीक नज़र बनाए हुए है क्योंकि खाड़ी देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं और युद्ध बढ़ने की स्थिति में उनकी सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री कार्यालय में उच्च स्तरीय बैठकें चल रही हैं ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटा जा सके। एयर इंडिया और अन्य एयरलाइंस ने तेहरान की अपनी सभी उड़ानें अनिश्चित काल के लिए रद्द कर दी हैं।

युद्ध विशेषज्ञों का मानना है कि यह सातवां दिन इस पूरे संघर्ष का सबसे टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। अगर आज ईरान ने बड़ा जवाबी हमला किया तो यह युद्ध तीसरे विश्व युद्ध की आहट दे सकता है। दुनिया की बड़ी ताकतें अब दो गुटों में बंटती नज़र आ रही हैं। एक तरफ अमेरिका, इजरायल और नाटो देश हैं तो दूसरी तरफ ईरान, रूस और कुछ हद तक चीन का समर्थन दिख रहा है। यह टकराव केवल ज़मीन और आसमान तक सीमित नहीं है बल्कि साइबर स्पेस में भी एक दूसरे की सरकारी वेबसाइटों और बैंकिंग सिस्टम को हैक करने की कोशिशें की जा रही हैं।

तेहरान की जो तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर आ रहे हैं उनमें जलती हुई गाड़ियाँ और मलबे में तब्दील सरकारी दफ्तर दिखाई दे रहे हैं। धुएं की वजह से शहर में सांस लेना दूभर हो गया है। ईरानी अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे सार्वजनिक स्थानों पर इकट्ठा न हों और बंकरों में ही रहें। स्कूल, कॉलेज और बाज़ार पूरी तरह बंद हैं और पूरी राजधानी एक भूतिया शहर जैसी नज़र आ रही है। जो शहर कभी अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता था वह आज बारूद की गंध और धमाकों के साए में है।

इजरायली सेना ने यह भी दावा किया है कि उन्होंने ईरान के कम्युनिकेशन नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है जिससे ईरानी कमांडरों के बीच तालमेल बिठाना मुश्किल हो गया है। अमेरिका ने अपने एयरक्राफ्ट कैरियर को फारस की खाड़ी में तैनात कर दिया है जो किसी भी बड़े हमले को नाकाम करने के लिए तैयार है। पूरे मिडिल ईस्ट के हवाई क्षेत्र को नागरिक उड़ानों के लिए बंद कर दिया गया है जिससे वैश्विक हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

अब सबकी निगाहें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक पर टिकी हैं लेकिन वहां भी वीटो पावर की वजह से किसी ठोस नतीजे की उम्मीद कम ही है। युद्ध का यह सातवां दिन इतिहास के पन्नों में काले अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है। आने वाले कुछ घंटे यह तय करेंगे कि दुनिया शांति की ओर बढ़ेगी या विनाश की ओर। फिलहाल तेहरान की ज़मीन से उठती लपटें और मिसाइलों की गड़गड़ाहट एक भयानक मंजर बयां कर रही हैं।

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